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बाघ और तेंदुए दिखें तो सूचना दें, न करें संघर्ष

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बहराइच। जिला मुख्यालय स्थित डीएफओ कार्यालय परिसर में मंगलवार को बाघ सुरक्षा माह के शुभारंभ पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें कतर्नियाघाट व बहराइच वन प्रभाग के वनकर्मी शामिल हुए। बैठक में गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने पर बल दिया गया। डीएफओ ने कहा कि गन्ने की कटान हो रही है। ऐसे में बाघ और तेंदुए बाहर निकलकर हमला कर रहे हैं। इस पर ग्रामीण सहयोग करते हुए वनकर्मियों को सूचना दें, संघर्ष न करें। जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा की जा सके।
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बहराइच वन प्रभाग के डीएफओ कार्यालय सभागार में बाघ सुरक्षा माह के शुभारंभ पर गोष्ठी व प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। अध्यक्षता बहराइच वन प्रभाग के डीएफओ मनीष कुमार सिंह ने की। गोष्ठी में डीएफओ ने कहा कि बाघ और तेंदुओं की सुरक्षा के लिए एक से 31 दिसंबर तक गांव व जंगल से सटे प्राथमिक विद्यालयों में जागरूकता गोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसके द्वारा ग्रामीणों को मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने पर बल दिया जाएगा। डीएफओ ने कहा कि जहां भी बाघ और तेंदुए निकले, उसकी सूचना वनकर्मियों को दें। जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी की जा सके। कतर्नियाघाट के डीएफओ यशवंत सिंह ने कहा कि जंगल से सटे गांवों में गन्ने की फसल काटी जा रही है। ऐसे में गन्ने के खेत में बसेरा बनाए बाघ और तेंदुए बाहर निकल रहे हैं। ग्रामीण इनको देखकर इन पर हमला न करें, बल्कि वनकर्मियों को सूचना दें। जिससे ग्रामीणों व वन्यजीवों को बचाया जाए। ग्रामीण पर भी हमला होने से रोका जा सके। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने कहा कि बाघ और तेंदुए गांवों में पहुंचते हैं तो ग्रामीण हमलावर हो जाते हैं। यह कानूनन अपराध है। इस पर अंकुश के लिए सभी सहयोग करें। वन्यजीवों के बिना मानव जीवन भी अधूरा है। ऐसे में इनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। बैठक में उप प्रभागीय वनाधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी डीके सिंह समेत अन्य मौजूद रहे।
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