पयागपुर में बीपीएल और पात्र गृहस्थी में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक पूर्व माननीय का पूरा परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों की सूची में दर्ज है। इतना ही नहीं सेवानिवृत्त खंड विकास अधिकारी व करीब 40 सरकारी कर्मचारी समेत 350 से अधिक अपात्रों के नाम सूची में दर्ज हैं। प्रतिमाह कोटेदार सभी के नाम से अनाज की उठान करता है। उपभोग प्रमाण पत्र लगाकर सत्यापन भी किया जाता है। अब मामले का खुलासा होने के बाद हड़कंप मचा है। जिला पूर्ति अधिकारी मामले की जांच करवाकर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
सार्वजनिक वितरण व्यवस्था पर आए दिन उंगलियां उठती हैं। लेकिन पयागपुर में ऐसा मामला सामने आया है, जहां कोटेदार पूर्व विधायक, रिटायर्ड खंड विकास अधिकारी, कई शिक्षक और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले ग्रामीणों का अनाज बांट रहा है।
इन सभी के नाम बीपीएल व अंत्योदय सूची में शामिल हैं। पयागपुर के दुकान संख्या 100100302218 का संचालन कोटेदार संतोष कुमार करते हैं। इनके द्वारा पात्र गृहस्थी समेत 633 कार्डधारकों को अनाज का वितरण किया जाता है। दुकान से जिन लोगों को अनाज मिलता है। वह सूची वर्ष 2015 में अस्तित्व में आई।
इस सूची में पयागपुर के तत्कालीन विधायक मुकेश श्रीवास्तव की पत्नी पूजा श्रीवास्तव का नाम क्रमांक संख्या 329 पर दर्ज है। कार्ड संख्या 170648 है। तत्कालीन विधायक के बड़े भाई अजय कुमार स्वास्थ्य विभाग में लिपिक के पद पर तैनात हैं। उनकी पत्नी सविता का नाम बीपीएल सूची में क्रमांक संख्या 328 पर दर्ज है। इसी तरह पूर्व विधायक के माता-पिता का नाम क्रमांक संख्या 321 पर है।
इनके पिता राजेंद्र प्रसाद सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर भी हैं। इतना ही नहीं पूर्व विधान परिषद सदस्य पद के प्रत्याशी व तत्कालीन विधायक के भाई बालेंदु प्रताप की पत्नी पारुल श्रीवास्तव का नाम क्रमांक 339 पर है। इसके अलावा सेवानिवृत्त खंड विकास अधिकारी शिवकुमार की पत्नी साधना देवी का नाम बीपीएल सूची में क्रमांक संख्या 308 पर है। यह तो बानगी भर है। इसके अलावा सीआरपीएफ के जवान कौशलेंद्र की पत्नी शशि शुक्ला का नाम क्रम संख्या 64 पर है।
सेवानिवृत्त फार्मेसिस्ट कृष्ण मनोहर की पत्नी इंदू श्रीवास्तव का नाम क्रम संख्या 365 पर दर्ज है। एसएसबी, पुलिस, नलकूप विभाग के भी कर्मचारी शामिल हैं। जिनकी पत्नियों के नाम से राशनकार्ड बने हुए हैं।
इसके अलावा 40 सरकारी कर्मचारी, 100 से अधिक रिटायर्ड कर्मचारी, सवा सौ की संख्या बड़े काश्तकार व अन्य गरीबी रेखा से ऊपर जीवनयापन करने वाले लोगों की है, जो हर माह गरीबों का अनाज खा रहे हैं। कोटेदार संतोष प्रतिमाह गोदाम से अनाज की उठान करता है। उपभोग प्रमाण पत्र तैयार होता है। अधिकारी सत्यापन कर उसकी पुष्टि करते हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थिति क्या है, इसका अंदाजा पयागपुर की सूची से ही लग सकता है। अपात्रों को बड़े पैमाने पर अनाज दिया जा रहा है। पयागपुर निवासी बिट्टू देवी की डेढ़ साल पूर्व मौत हो चुकी है। उनका नाम क्रम संख्या 248 पर है। हर माह राशन ले रही हैं। क्रम संख्या 460 पर शांती पत्नी छंगा का नाम दर्ज है। पति-पत्नी दोनों की मौत साल भर पूर्व हो चुकी है। इसी तरह अन्य मृतकों के नाम भी शामिल हैं।
जिस सूची से अनाज का वितरण हो रहा था। वह सूची में क्रम संख्या 75, 76 पर चैतू और उनकी पत्नी कलावती दोनों के नाम अंकित हैं। इसी तरह क्रम संख्या 93, 94 पर सियाराम और उनकी पत्नी मुन्नीदेवी का नाम है। रामप्यारी पत्नी बसेही का नाम क्रम संख्या 146 व 147 पर दो-दो बार है।
पयागपुर के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव का कहना है कि बीपीएल सूची में उनका और उनके परिवार का नाम दर्ज है। इसकी जानकारी नहीं है। न ही कभी अनाज खाद्यान्न लिया। वहीं कोटेदार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।
जिस सूची से अनाज का वितरण हो रहा है। वह सूची वर्ष 2015 में बनी थी। मुकेश श्रीवास्तव विधायक 2012 में चुने गए। ऐसे में विधायक रहने के दौरान मामला नहीं खुला।
जिला पूर्ति अधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि अनाज वितरण सूची में घोटाले की जानकारी नहीं थी। अब पता चला है। पूर्ति निरीक्षक देवेशचंद्र भारती से मामले की जांच कराएंगे। इसके बाद अपात्रों के नाम हटाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।