बहराइच/शिवपुर। परसा अगैया गांव में 10 वर्षीय विवेक वर्मा की निर्मम हत्या के मामले में अदालत द्वारा आरोपी अनूप वर्मा को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भले ही पीड़ित परिवार को न्याय की अनुभूति हुई हो, लेकिन कानूनी रूप से यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। कानून के मुताबिक फांसी की सजा पाए किसी भी अभियुक्त के मामले में आगे की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से उच्च न्यायालय से होकर गुजरती है।
कानूनी जानकार संतोष सिंह के अनुसार, चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को सीधे लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए जिला न्यायालय को पूरा रिकॉर्ड इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजना होगा, जहां डेथ रेफरेंस के तहत मामले की स्वतः समीक्षा होगी। हाईकोर्ट सजा की पुष्टि, संशोधन या उम्रकैदमें परिवर्तन का निर्णय ले सकता है।
अभियुक्त को अपील का अधिकार : वरिष्ठ अधिवक्ता बीडी वर्मा का कहना है कि दोषसिद्ध अनूप वर्मा को भी हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने का अधिकार है। यदि हाईकोर्ट से भी फांसी की सजा बरकरार रहती है, तब सर्वोच्च न्यायालय में अंतिम अपील का विकल्प खुला रहेगा।