बहराइच। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लौकाही को ई-पीएचसी बनाया गया है। यहां पर वर्ष भर में 6773 मरीजों ने इलाज कराया है। बीते वर्ष से शुरू हुए इस अभियान से घर बैठे लोगों ने वीडियो कॉलिंग के माध्यम से परामर्श लेकर इलाज करवाया है। इलाज करने के मामले में चंदौली को प्रदेश में प्रथम और बहराइच को दूसरा स्थान मिला है।
प्रदेश के 10 जनपदों को ई-पीएचसी के लिए चुना गया था। इनमें बहराइच भी शामिल था। जिले से 70 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लौकाही का स्वास्थ्य विभाग की ओर से ई-पीएचसी के रूप में चयन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सुदूर क्षेत्र के लोगों को नि:शुल्क इलाज देना है। प्रभारी सीएमओ डॉ. अजीत चंद्रा ने बताया कि ई-पीएचसी में नर्स, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट की तैनाती होती है। यहां पर आने वाले मरीजों का स्वास्थ्य कर्मी पंजीकरण करते हैं। इसके बाद इसकी जानकारी अपने कमांड सेंटर को भेजते हैं। वीडियो कॉलिंग के माध्यम से डॉक्टर मरीज को परामर्श देते हैं। सीएमओ ने बताया कि ई-पीएचसी लौकाही पर अब तक 6773 मरीजों ने इलाज कराया है। जिससे इलाज करने के मामले में ई-पीएचसी को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है। जबकि चंदौली को पहला स्थान मिला है। स्वास्थ्य सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि ई-पीएचसी पर आने और फोन पर परामर्श लेने वाले सभी मरीजों को इलाज व दवा बताई जा रही है। जिससे उन्हें अधिक खर्च नहीं उठाना पड़ रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में भी डिजिटल भारत का प्रसार हो रहा है।
ई-पीएचसी पर 21 जांच मुफ्त
स्वास्थ्य सूचना व शिक्षा अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि ई-पीएचसी यानि इलेक्ट्रानिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रदेश में पीपी मॉडल पर विकसित किएग ए हैं। यहां पर ईसीजी, एचआईवी, डेंगू, मलेरिया समेत 21 पैथोलाजिकल जांच मुफ्त में की जाती है।
100 पीएचसी को ई-पीएचसी से जोड़ा जाएगा
ई-पीएचसी के निदेशक डॉ. वीके सिंह ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत अभी तक प्रदेश में सिर्फ 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का चयन हुआ है। यहां पर बेहतर परिणाम आए हैं। उन्होंने कहा कि 100 ऐसे पीएचसी जो बंद होने की कगार पर हैं, उनको ई-पीएचसी से जोड़ेंगे। साथ ही कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर से मिलकर गैर संचारी रोग पर भी काम करेंगे।