अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे किसान
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विधानसभा चुनाव की दुंदुभी बज चुकी है। राजनेता गांव-गांव व गली-गली खाक छानने लगे हैं। पांच वर्ष पूर्व किए गए वादे उन्हें याद आने लगे हैं। एक बार पुन: उन्हीं वादों को दोहरा कर उसे पूरा करने की दुहाई दे रहे हैं। लेकिन बीते पांच वर्षों में न तो उन्हें अपने वादे याद रहे और न ही लोगों की परेशानी।
जमुनहा बाजार स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में आयोजित अमर उजाला के वोटर अड्डा में जब ग्रामीणों को एक मंच पर एकत्र कर पूछा गया कि हमारा नुमाइंदा कैसा हो, इस पर सभी की पीड़ा छलक कर सामने आ गई।
उनका कहना था कि क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका का कोई हल नहीं निकला। बदहाल मार्ग ज्यों के त्यों हैं। आवागमन के संसाधनों का टोटा पूर्ववत बना हुआ है। बेरोजगारी व भ्रष्टाचार के साथ कई मुद्दे आज भी ज्यों के त्यों बने हुए हैं। लेकिन मतदाता इनसे अलग हट कर तराई का विकास चाहता है।
सभी ग्रामीणों ने कहा कि जाति व धर्म से ऊपर उठ कर विकास कार्य करने वाले को ही अपना रहनुमा चुनने के लिए हमें जाति-धर्म, भाई भतीजावाद, क्षेत्रवाद से ऊपर उठना होगा। तभी जनप्रतिनिधि भी अपने वादों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।
इस बार सभी मतदाता जरूरी से जरूरी काम छोड़ कर अपने पोलिंग बूथ जाएं तथा अनिवार्य रूप से मतदान करें। सभी लोग जाति व धर्म के नाम पर वोट मांगने वाले को बाहर का रास्ता दिखाएं। क्षेत्र के प्रति निष्ठावान, ईमानदार और शिक्षित को ही अपना जनप्रतिनिधि चुनें, तभी विकास हो सकेगा और लोगों को समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।