बहराइच। यूपी उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को डीएम कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। इस मौके पर उन्होंने केंद्र सरकार पर मजदूर व जनविरोधी होने का आरोप लगाते हुए डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री व श्रम सेवायोजन मंत्री को ज्ञापन भेजा।
धरने की अध्यक्षता करते हुए संगठन के प्रदेश सचिव कामरेड पंकज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्रीय श्रम संगठनों व स्वतंत्र फेडरेशनों की अगुवाई में केंद्र सरकार की मजदूर व जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने अपने सौ दिनों के कार्य की प्राथमिकता घोषित कर दी है।
सरकार की प्राथमिकता के पहले चरण में रेलवे, बिजली, स्टील सहित कई सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का निजीकरण करना व श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी व मालिकों के पक्ष में बदलाव का एजेंडा जारी कर दिया है। प्रदेश सचिव पंकज ने कहा कि कानून में बदलाव करने का मकसद मालिकों, पूंजीपतियों व कॉरपोरेट के लिए सस्ते मजदूर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि केंद्र की मादी सरकार का एजेंडा मजदूर व जनविरोधी है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। संगठन के शाखा अध्यक्ष वीके पाठक रामजी ने कहा कि सरकार सबका साथ सबका विकास की बात तो करती है, लेकिन उसके कार्य करने से यह स्पष्ट हो गया कि केंद्र की मोदी सरकार को लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है।
प्रदर्शन के दौरान पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार के कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए प्रधानमंत्री व श्रम सेवायोजन मंत्री भारत सरकार को ज्ञापन भेजकर सार्वजनिक क्षेत्र को पूंजीपतियों के हाथ में बेचने और मजदूर विरोधी श्रम संशोधन वाले निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की।
पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती है, तो जनांदोलन के माध्यम से सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जायेगा। इस मौके पर अक्षय मिश्रा, नीरज श्रीवास्तव, बलवीर सिंह, कुलदीप वैश्य, गोपालजी पाठक, जीशान तैय्यब, रीतेश, विनीत मिश्रा, अजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।