जरवलरोड के करमुल्लापुर में मां को मुखाग्नि देती श्रेयांशी।
जरवलरोड। मां की अर्थी के पीछे चल रही 19 वर्षीय श्रीयांशी की आंखों में मंगलवार को ऐसा दर्द था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। पैतृक गांव करमुल्लापुर में मां अर्चना सिंह की चिता को मुखाग्नि देने की रस्म पूरी करते ही श्रीयांशी के आंसू बह निकले। वह मां को याद कर बिलख पड़ी। बेटी का यह दर्द देखकर अंतिम संस्कार में मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें भी नम हो गईं। जिस मां ने सात साल तक अकेले बेटी को संभाला, उसी मां को बेटी ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
करमुल्लापुर निवासी कन्हैया सिंह की बेटी अर्चना सिंह की जिंदगी पिछले कई वर्षों से संघर्षों से भरी रही। करीब सात वर्ष पहले पति अजय सिंह से तलाक के बाद उन्होंने अपनी इकलौती बेटी श्रीयांशी की जिम्मेदारी खुद संभाली। भाई न होने के कारण मायके की जिम्मेदारियां भी उनके कंधों पर थीं। परिवार और बेटी की जिम्मेदारी के बीच उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। अर्चना नौकरी के साथ बेटी के भविष्य को संवारने में जुटी रहीं। वह बलरामपुर स्थित सिविल जज जूनियर डिविजन एफटीसी/सीएडब्ल्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेशकार के पद पर तैनात थीं। नौकरी के साथ बेटी की परवरिश और मायके की जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने जीवन का अधिकांश समय परिवार के लिए समर्पित कर दिया।
सोमवार सुबह बलरामपुर स्थित किराये के मकान में उनकी मौत की खबर सामने आई तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। मंगलवार को अर्चना का पार्थिव शरीर करमुल्लापुर पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों और परिचितों की भीड़ उमड़ पड़ी। अंतिम संस्कार की रस्म शुरू हुई तो श्रीयांशी मां के पार्थिव शरीर के पास खड़ी रही। चिता को मुखाग्नि देने के बाद जैसे ही उसे मां के हमेशा के लिए चले जाने का अहसास हुआ, उसकी आंखों से आंसू बह निकले।
जरवलरोड के करमुल्लापुर में मां को मुखाग्नि देती श्रेयांशी।