फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डाला छठ पर तटों की सफाई कराना भूला प्रशासन

Sat, 14 Nov 2015 09:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। रविवार को नहाय खाय के साथ भगवान सूर्य की आराधना का क्रम शुरू होगा।
विज्ञापन


जबकि नदी, नाले व तालाब के पूजित तट पर 17 नवंबर की शाम और 18 नवंबर की भोर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

लेकिन, अभी तक पूजित स्थानों पर साफ-सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है न ही प्रकाश की व्यवस्था हुई है। इसके चलते अव्यवस्था के बीच छठ पूजा की परंपरा का निर्वहन करना सभी की मजबूरी होगी।

छठ पूजा के तहत कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को तालाब या नदी के तट पर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। पर्व के चार चारण हैं।

इसमें पहले दिन रविवार को माताएं लौकी का पकवान खाएंगी। दूसरे दिन चावल का मीठा पकवान (खरना) खाएंगी। तीसरे दिन 17 नवंबर को निराजल व्रत रखकर शाम में नदी, तालाबों, नहरों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी।
विज्ञापन


वहीं, चौथे दिन उगते सूर्य को प्रात:काल अर्घ्य देकर पुत्र के सलामती की दुआ मांगते हुए व्रत का पारण करेंगी।

शहर के सरयू नदी पर स्थित झिंगहाघाट, छोटी बेरिया, उर्रा के सोती नाला, मिहींपुरवा में सरयू नदी के तट पर रुपईडीहा के हनुमंत सरोवर तथा नेपालगंज बांके जिले में स्थित बागेश्वरी माता मंदिर के तालाब, रानी तालाब और राप्ती नदी के तट पर सूर्य देवता की आराधना के लिए दो दिन निराजल व्रत रहकर अर्चना की जाती है।

लेकिन, अभी तक इन पूजित तटों पर साफ सफाई नहीं हुई है। कहीं जलकुंभी और सेवार से तट पटा है तो कहीं गंदगी के चलते खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। इसी गंदगी के बीच छठ पूजा की परंपरा का निर्वहन करना सभी की मजबूरी होगी।

ये है मान्यता

छठ पर्व पर भगवान सूर्य की आराधना महाभारत काल से होती है। लोगों का मानना है कि महाभारत काल में दुर्योधन ने अपने मित्र कर्ण को धनुष विद्या की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए लगाए गए शर्त को पूरा करते हुए कुंती पुत्र कर्ण को अंग प्रदेश का राज्य देकर उन्हें अंग देश का राजा बनाया था।

राजा कर्ण ने अपने देश की जनता के सुख, समृद्धि के लिए अपने पिता सूर्य की आराधना शुरू की थी तभी से माताएं भगवान सूर्य की आराधना कर अपने बच्चों की सलामती की दुआएं मांगती आ रही हैं।

सफाई व्यवस्था के दिए निर्देश
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष हाजी रेहान ने बताया कि छठ पर्व के मद्देनजर झिंगहाघाट स्थित सरयू तट और छोटी बेरिया मंदिर स्थित तालाब के तट जी साफ सफाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य पर्व 17 और 18 नवंबर को है। इस दिन से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाएगी।

छठपूजा के प्रति हमेशा बरती जाती है कोताही

शहर के मोहल्ला घसियारीपुरा निवासी मालती सिंह का कहना है कि छठ पर्व की शुरुआत रविवार से हो जाएगी लेकिन अभी तक छोटी बेरिया और सरयू के झिंगहाघाट तट पर साफ सफाई नहीं शुरू हुई है।

इसके चलते 17 नवंबर की शाम और 18 नवंबर को भोर में दिक्कतें उठानी पड़ सकती हैं। मिहींपुरवा निवासी कुसुम लता गुप्ता और राजेश्वरी देवी का कहना है कि छठ पूजा को लेकर अक्सर प्रशासन कोताही बरतता है।
विज्ञापन


बिहार, झारखंड, उड़ीसा, बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिसंख्य लोग जिले में निवास करते हैं, जिनका इस पर्व से जुड़ाव है। इसके बावजूद साफ सफाई के मामले में प्रशासनिक कोताही से श्रद्धालु आहत होते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें