बहराइच। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर सालाना उर्स की शुरुआत परचमकुसाई और बंदूकों की सलामी के साथ हुई। इस मौके पर रस्मपगड़ी की परंपरा का निर्वहन हुआ।
विभिन्न अंचलों से आए जायरीन ने गाजी की दरगाह पर चादर पेश कर अमन-चैन की दुआ मांगी। देर रात भव्य नातिया मुशायरा हुआ।
शाही मस्जिद में कुरानख्वानी से हुई शुरुआत में शाही मस्जिद के इमाम मौलाना अरशदुल कादरी, दरगाह शरीफ मस्जिद, खसियारी मस्जिद के मौलाना अब्दुल रहीम, बड़ी तकिया के कारी मुजफ्फर, मौलाना गुल मोहम्मद और मौलाना अजीज छोटी तकिया के मौजूद रहे।
परंपरा के तहत खादिम और खुद्दाम की रस्मपगड़ी हुई। दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद शमशाद की अगुवाई में सभी ने गाजी की दरगाह पर पहुंचकर अमन चैन की दुआ मांगी। नाल दरवाजे पर परचमकुसाई का कार्यक्रम हुआ।
दरगाह के किलों पर लगे झंडे बदले गए। 1013वां उर्स होने के चलते दरगाह प्रबंध समिति की ओर से गाजी के उर्स मौके पर 1013 गोले दागे गए। बंदूकों से सलामी दी गई।
इसके बाद गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बलिया, बस्ती, आजमगढ़, बिहार, रांची, दिल्ली, कोलकाता, राजस्थान आदि स्थानों से जत्थों में आए जायरीन गाजी की दरगाह पर चादर पेश कर सुख समृद्धि की कामना की। अपने साथ लाए तबर्रुख को भी गाजी की खिदमत में पेश कर हाजिरी लगाई।
रात में दरगाह शरीफ के नाल दरवाजे के सामने नातिया मुशायरे का आयोजन हुआ। इस मौके पर प्रबंध समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने तकरीर भी की। मुशायरे में दिल्ली, पटना, रुड़की, रामपुर, लखनऊ के शायरों ने शिरकत कर गाजी की शान में कसीदे पढ़े।
मुशायरे की अध्यक्षता अशर बहराइची, उमर फारुकी लहरपुरी ने की। बुधवार सुबह फिर अमन-ओ-अमान की दुआओं के साथ उर्स के दूसरे दिन की जियारत का सिलसिला शुरू हुआ। देर शाम तक गाजी की मजार पर जायरीन पहुंचकर हाजिरी लगाते रहे।
प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य बच्चे भारती ने बताया कि उर्स में ढाई लाख से अधिक जायरीन दरगाह पहुंचे हैं। कार्यक्रम में मोहम्मद वसीम मेकरानी, मकसूद अहमद रायनी, ओएसडी खुर्शीद अनवर रिजवी, सहायक प्रबंधक अलीमुल हक समेत काफी संख्या में खादिम और खुद्दाम मौजूद रहे।