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इजराइल व हालैंड की तर्ज पर तराई में लहलहाएंगी फसलें

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बहराइच। केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्नतिशील खेती पर विशेष ध्यान दे रही है। सब्जियों के साथ ही कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली फसलों पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए आधुनिक तकनीक को खेती-किसानी में शामिल किया जा रहा है। जल्द ही तराई के किसान इजराइल व हालैंड की हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से बिना मिट्टी के बहुत ही कम लागत में पानी में खेती कर सकेंगे। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरह पानी भरे गिलास या किसी बोतल में पौधे की टहनी रख दी जाए तो उसमें जड़े निकल आती हैं। उसी तरह हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से कम लागत में फसलों को उगाया जा सकेगा। उद्यान विभाग की ओर से जल्द ही मॉडल के तौर पर इसकी नर्सरी विकसित की जाएगी।
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बढ़ते शहरीकरण व आबादी के कारण पेड़-पौधों को उगाने के लिए जमीन की कमी होती जा रही है। ऐसे में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक काफी कारगर होगी। फिलहाल इस तकनीक से इजराइल व हालैंड देश के अलावा भारत के छत्तीसगढ़ में खेती की जा रही है। यूपी में भी इस तकनीक को विकसित करने के लिए उद्यान विभाग ने कमर कस ली है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र कहते है कि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से पौधों और चारे वाली फसलों को नियंत्रित परिस्थितियों में 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में 80 से 85 प्रतिशत आर्द्रता में उगाया जा सकता है। उनका कहना है कि आमतौर पर पेड़-पौधे अपना पोषक तत्व जमीन से लेते हैं, लेकिन इस तकनीक से पौधों को उगाने के लिए एक विशेष प्रकार का घोल डाला जाता है।
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पौधों की बढ़वार के लिए आवश्यक खनिज व पोषक तत्व मिलाये जाते हैं। पानी, पथरीली जमीन व बालू में उगाई जाने वाली फसलों में इस घोल को महीने में एक से दो बार डाला जाता है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक व आयरन होता है। इस तकनीक से जलवायु की विपरीत परिस्थितियों में भी पौधे उगाये जा सकते हैं।
फसल उत्पादन में खर्च में आएगी कमी
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से बहुत ही कम खर्च में फसलें उगाई जा सकती हैं। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो पांच से आठ इंच ऊंचाई वाले पौधे में एक रुपये से भी कम खर्च आएगा। इसके अलावा पौधों में आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए खनिजों के घोल की कुछ बूंदें ही डालने की जरूरत है। इसकी मदद से कहीं भी पौधा उगाया जा सकता है। इस तकनीक से बागवानी करने पर पानी का बीस फीसदी हिस्सा ही काफी है। साग-सब्जी घरों में ही उगाई जा सकेंगी। मिट्टी से कम संपर्क होने के चलते इन फसलों में कीटनाशकों का भी उपयोग नहीं करना पडे़गा।
कम समय में तैयार होगी फसल
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से गेहूं व अन्य अनाजों की पौध सात से आठ दिन में तैयार हो जाएगी। जबकि आम तौर पर इनकी पौध तैयार होने में महीनों लग जाते हैं। इस तकनीक से तैयार हरे चारे में अधिक ऊर्जा व विटामिन होता है, जिसे खिलाकर मवेशियों में दूध की मात्रा भी बढ़ाई जा सकती है।
उद्यान विभाग की ओर से जल्द ही बहराइच में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का एक मॉडल तैयार किया जाएगा। इस तकनीक से इजराइल, हालैंड के अलावा छत्तीसगढ़ में खेती हो रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हाइड्रोपोनिक्स तकनीकि को विकसित करने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है। इसका फायदा किसानों को मिलेगा।
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- आरके वर्मा, वरिष्ठ उद्यान सलाहकार बहराइच
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