रामगांव और नवाबगंज थाना क्षेत्र में वर्ष 2012 और 1997 में दो महिलाओं की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर चार व छह के न्यायाधीशों ने सिर्री गोड़िया समेत छह आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार रुपये भी जुर्माना लगाया है।
दीवानी कचहरी के सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी फिरोज अहमद खां ने बताया कि रामगांव थाना क्षेत्र के मौलवीपुरवा गुलहरिया चाकूजोत निवासी कनछेद ने 24 मई 2012 को रामगांव थाने में अपनी मां विद्यावती की हत्या का केस दर्ज कराया था।
नछेद के मुताबिक 24 मई को दोपहर में विद्यावती मवेशियों के लिए घास लेने खेत को गई थी। तभी खुरपी से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कनछेद ने गुलहरिया निवासी सिर्री गोड़िया को नामजद करते हुए हत्या का केस दर्ज कराया था। विवेचना और परीक्षण के दौरान सिर्री गोड़िया व विपक्षियों के बयान दर्ज हुए। मंगलवार को हत्या की फाइल कोर्ट नंबर चार अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेश चंद्र भारती के सामने प्रस्तुत हुई।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश भारती ने आरोपी सिर्री गोड़िया को हत्या समेत दो अन्य मामलों में दोष सिद्ध करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
उधर, कक्ष संख्या छह पर नवाबगंज में वर्ष 1997 में हुई हत्या के केस की सुनवाई हुई। एडीजीसी क्रिमनल मनोज कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 1997 में जमीन की रंजिश के चलते नवाबगंज के त्रिलोकपुर निवासी मिथलेश, सुरेश, नरेश, ओमप्रकाश और रामजस ने रायपुर टेपरहा निवासी सत्यनरायन की सास महेशा की गला रेतकर हत्या कर दी थी।
इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीताराम निगम ने सुनवाई करते हुए मिथलेश, सुरेश, नरेश और ओमप्रकाश को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जबकि आरोपी रामजस को धारा 120बी हत्या की साजिश रचने के मामले में उम्रकैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।