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भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाली डॉक्टर को छह माह की सजा

Thu, 01 Oct 2015 10:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। शहर के आकांक्षा अल्ट्रासाउंड सेंटर में भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाली सेंटर की संचालिका डॉ. छाया श्रीवास्तव को बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने छह माह की सजा सुनाई। दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया लेकिन मौके पर ही उन्हें जमानत भी दे दी गई।
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लिंग परीक्षण का खुलासा वर्ष 2013 में राज्य सर्वेक्षण बोर्ड की जांच में हुआ था। यहां अभिलेखों में भी हेराफेरी की जा रही थी। न्यायालय के फैसले के बाद अब उनका लाइसेंस निरस्त कर मशीन जब्त कर ली जाएगी।

शहर के मोहल्ला कानूनगोपुरा उत्तरी निवासी डॉ. छाया श्रीवास्तव आकांक्षा अल्ट्रासाउंड का संचालन करती हैं। अल्ट्रासाउंड पर लिंग परीक्षण करने व अन्य कई प्रतिबंधित जांच करने की शिकायतें वर्ष 2013 में शासन में की गई थी। इस पर राज्य सर्वेक्षण बोर्ड की गठित टीम ने अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा मारा था।
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जांच में पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों के तहत फार्म एफ अपूर्ण मिले थे। गर्भवती महिला के पति का नाम, बच्चे की संख्या, फोन नंबर अंकित नहीं मिला था। साथ ही जांच का परिणाम फॉर्म पर नहीं लिखा था। कुछ फार्मों पर चिकित्सक के हस्ताक्षर मिले थे, जिन पर लिंग परीक्षण का हवाला था।

डॉ. छाया ने जांच के दौरान इन आरोपों को लिखित रूप से स्वीकार भी किया था। इतना ही नहीं, गर्भवती महिलाओं के अधिनियम के तहत अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ओपीडी रजिस्टर होना आवश्यक है, वह भी उपलब्ध नहीं था।

डॉ. छाया ने सीएमओ कार्यालय में 25 अप्रैल 2013 को जो रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, उस रिपोर्ट में 26 मार्च से 25 अप्रैल तक महज पांच केस दर्शाये गए थे लेकिन रिपोर्ट का अध्ययन करने पर पांच अप्रैल से 25 अप्रैल के मध्य पांच केस मिले थे।

26 मार्च से पांच अप्रैल के बीच कोई भी रिकॉर्ड दर्शाया नहीं गया था। उसके अलावा अन्य भी कई खामियां थीं। इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने वाद दायर किया था, जिसमें उस समय डॉ. छाया को जमानत दे दी गई थी। मामला कोर्ट में विचाराधीन था।

बुधवार को राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी पीसी यादव व अजय कुमार श्रीवास्तव तथा बचाव पक्ष के वकील ने बहस की। बहस सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमप्रकाश वर्मा ने डॉ. छाया श्रीवास्तव को लिंग परीक्षण में दोषी पाते हुए उनकी जमानत अर्जी निरस्त कर दी है।

सीजेएम ने डॉ. छाया को पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। दो हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। सजा के बाद डॉ. छाया को अदालत में ही हिरासत में ले लिया गया। हालांकि, मौके पर ही उनके अधिवक्ता ने न्यायालय पर जमानत अर्जी दाखिल की, जिस पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने डॉ. छाया को जमानत दे दी।
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