बहराइच। तराई में 10 में से चार लोग हृदय संबंधी किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हैं। इनमें आधी संख्या युवाओं की है। इसका मुख्य कारण जागरूकता और अस्पताल में संसाधनों की कमी मानी जा रही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर हृदय रोग के इलाज की कोई व्यवस्था न होने के चलते रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। आए दिन इलाज में देरी से मौते भी होती हैं।
हृदय रोग का मतलब अमूमन हार्ट अटैक समझा जाता है। लेकिन हृदय से संबंधित कई बीमारियां ऐसी हैं जो व्यक्ति की जिंदगी के लिए मुश्किल बन जाती हैं। इनमें कुछ जन्मजाति बीमारियां होती हैं तो कुछ रहन-सहन और खानपान से उपजी बीमारियां हैं। जिसके चलते लोगों की जिंदगी दांव पर लगती है। जिले में 36 लाख की आबादी है। लेकिन इनमें से लगभग 12 लाख लोग हृदय से संबंधित किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हैं। जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय श्रीवास्तव का कहना है कि जागरूकता का अभाव, दिनचर्या की अनियमितता और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही व्यक्ति के रोगी होने का कारण बन जाती है। उन्होंने बताया कि 10 में से हर चार व्यक्ति हृदय रोग की बीमारी से ग्रसित है। इनमें युवाओं की संख्या आधी है। यह चिंताजनक स्थिति है, लेकिन हृदय रोगियों के ग्राफ में कमी तभी आ सकती है। जब समुचित इलाज के संसाधन मुहैया हों और लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों।
मरीजों की है फौज, संसाधन कुछ भी नहीं
जिले में हृदय रोग से संबंधित मरीजों की पूरी फौज है। लेकिन जिला अस्पताल के अलावा पीएचसी और सीएचसी पर इलाज की सुविधा मुहैया नहीं है। जिला अस्पताल में भी ईसीजी मशीन के अलावा कोई सुविधा नहीं है। महज 10 बेड हैं। इनमें छह बेड पोस्ट आईसीयू और चार बेड आईसीयू वार्ड में स्थापित हैं।
दवाओं की भी है कमी
जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय का कहना है कि सामान्य दवाएं तो पर्याप्त मात्रा में हैं। लेकिन हृदय रोग से संबंधित वह दवाएं जो हार्ट अटैक के दौरान प्रयोग की जाती हैं। काफी कम है। जबकि मरीजों की संख्या साल भर में बढ़ी हैं। प्रतिदिन कोई न कोई मरीज ऐसा आ रहा है जो हार्ट अटैक की समस्या से ग्रसित है।
हृदय रोग से संबंधी प्रमुख बीमारियंा
केंजेनाइटल हार्ट डिलीज- यह जन्मजात बीमारी होती है। इसके तहत व्यक्ति के जन्म लेने के समय ही बीमारी की शुरुआत होती है। किसी के फेफड़े और गिल की नसें जुड़ी नहीं होती हैं तो किसी का वाल गड़गड़ होता है। कभी-कभी दिल में छेद होने की घटनाएं भी सामने आती हैं। मां के अनियमित खानपान, गलत दवाओं का सेवन करने से यह बीमारी घर करती है।
रोमेटिक हार्ट डिजीज- यह बीमारी बैक्टीरिया के प्रभाव में आने से पनपती है। अर्थराइटिस के मरीजों को यह बीमारी अधिक होती है।
हाइपर टेंसिव हार्ट डिजीज- लंबे समय तक वायरल की चपेट में रहने, गलत दवा का सेवन करने से हाइपर टेंसिव हार्ट डिजीज की स्थिति बनती है।
हार्ट अटैक- यह बीमारी अधिक तनाव, एक्सर साइज न करने, मोटापा अधिक होने, सुगर बढ़ने के कारण होती है।
ऐसे करें बचाव
स्पाइसी खाना खाने से परहेज करें
सुगर के रोगी हैं तो नियमित आहार विहार पर ध्यान दें
तनाव से बचें, नियमित एक्सरसाइज करें
40 साल से अधिक के हों तो हर छह माह पर चेकअप कराएं
अनावश्यक एंटी बायोटिक दवाओं को खाने से बचें