मुंबई के होटलों और ढाबों पर काम कर रहे 16 बाल श्रमिकों को एक संस्था ने मुक्त कराया है। बहराइच जनपद के रहने वाले किशोरों को यहां लाकर चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया गया है। यहां पहुंचे किशोरों ने अपने परिवार की आर्थिक जरुरतों को पूरा करने के लिए काम करने की बात कही है।
मुंबई में बच्चों के सुधार की दिशा में काम कर रही स्वयंसेवी संस्था माई होम इंडिया को बहराइच के कुछ किशोरों द्वारा वहां होटलों और ढाबों पर काम करने की जानकारी मिली थी। इस पर संस्था ने लखनऊ की पुलिस से संपर्क साधा था।
लखनऊ की पुलिस की मदद से मुंबई की संस्था ने किशोरों को वहां होटलों व ढाबों से मुक्त कराया। मुक्त हुए किशोरों की उम्र 12 से 16 वर्ष के बीच है। उनमें मोतीपुर, नानपारा, हुजूरपुर आदि क्षेत्रों के अलग-अलग गांवों के रहने वाले 16 किशोरों को बच्चों को मुक्त कराने के बाद संस्था के सदस्यों ने लखनऊ पुलिस की मदद से बहराइच भेजा।
शनिवार को किशोर यहां पहुंचे और पुलिस अधीक्षक सालिकराम वर्मा के सामने पेश हुए। इस दौरान किशोरों ने बताया कि वह अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए काम की तलाश में मुम्बई गए थे। वहां होटल व ढाबे वाले काम करवा रहे थे। ऐसे किशोरों को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया है।