महसी (बहराइच)। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की बयार बहाने व गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए सरकार की ओर से व्यक्तिगत शौचालयों के साथ हर गांव में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करवाया गया है। सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए महिला कर्मियों की तैनाती कर उन्हें प्रति माह 6,000 रुपये मानदेय और साफ-सफाई के लिए 3,000 रुपये भी दिए जाते हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों की उदासीनता और कर्मियों की लापरवाही के चलते ग्रामीण स्वच्छता की योजना को पंख नहीं लग पा रहे हैं। देखरेख के अभाव में जहां कई शौचालय बंद हैं तो कई स्थानों पर मूलभूत संसाधन तक गायब हैं। प्रस्तुत है पड़ताल करती हुई एक रिपोर्ट...
सीन- एक, हरदी
ताले में कैद रहा शौचालय
महसी विकासखंड के ग्राम पंचायत हरदी स्थित सामुदायिक शौचालय में रविवार सुबह ताला लटकता मिला। वहीं, आसपास काफी गंदगी फैली हुई थी। ग्रामीण राम खेलावन ने बताया कि निर्माण के बाद से ही शौचालय में ताला जड़ा हुआ है। संचालन के लिए किसी की तैनाती है भी कि नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं।
सीन- दो, सधुवापुर
गायब मिले शौचालय के दरवाजे
ग्राम पंचायत सधुवापुर का सामुदायिक शौचालय खुला तो मिला, लेकिन अंदर अव्यवस्थाओं की भरमार रही। अंदर जगह-जगह गंदगी का अंबार था और शौचालय के दरवाजे भी गायब मिले, सीट धंसी थी। देख कर ही लग रहा था कि सीट की महीनों से साफ-सफाई नहीं की गई थी।
सीन- तीन, चांदपारा
गंदगी की भरमार, सीट व फर्श धंसी
ग्राम पंचायत चांदपारा स्थित सामुदायिक शौचालय का ताला खुला मिला, लेकिन मौके पर कोई नहीं था। गंदगी से पटे शौचालय की सीट व फर्श धंसी हुई थी। पानी नल टूटा था और उसमें लकड़ी लगा कर पानी के बहाव को रोकने का प्रयास किया गया था। शौचालय से भीषण दुर्गंध आ रही थी।
सीन- चार, महसी
कमोड व बेसिन टूटा
महसी स्थित सामुदायिक शौचालय में अव्यवस्थाओं की भरमार थी। शौचालय का कमोड टूटा मिला। यही नहीं, हाथ धोने के लिए लगाया गया वॉश बेसिन भी टूटकर नीचे गिरा हुआ था। ग्रामीण रमजान ने बताया कि इस सामुदायिक शौचालय का संचालन काफी दिनों से बंद है।
कराएंगे जांच
स्थिति की जानकारी नहीं है। टीम भेजकर शौचालयों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- हेमंत कुमार, बीडीओ महसी