तराई में मौसम के बदलाव का असर कतर्नियाघाट सेंच्युरी में मगर और घड़ियालों पर दिख रहा है। मौसम में गर्मी होने के कारण मादा घड़ियाल और मगरमच्छ का प्रजनन इस बार पहले शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में संभावित स्थलों पर वन महकमे ने चौकसी तेज कर दी है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के बीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी मगरमच्छ और घड़ियालों के कुनबे में इजाफे के लिए काफी मुफीद मानी जाती है। गेरुआ नदी में प्रवास करने वाले मगरमच्छ और घड़ियाल का प्रजननकाल फरवरी से शुरू हो जाता है।
मार्च के अंत तक मादा घड़ियाल अंडो को गेरुआ नदी के टापू पर सहेजते हैं। लेकिन इस बार तराई के मौसम में गर्मी के कारण अभी से टापुओं पर इनकी सक्रियता बढ़ गई है। प्रभागीय वनाधिकारी की माने तो मौसम में गर्मी होने के कारण मगरमच्छ और घड़ियाल नदी में स्थित टापू पर बालू में नेस्ट बनाकर अंडों को सहेजने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
डीएफओ ने बताया कि मगर और घड़ियाल के मेंटिंग की प्रक्रिया नदी के अंदर ही होती है। लेकिन वह नदी के टापुओं पर धूप सेंकने के लिए आते हैं। बीते वर्ष इस मौसम में टापू पर कम मगरमच्छ और घड़ियाल धूप सेंकते दिखते थे। लेकिन इस बार संख्या अधिक दिख रही है।
डीएफओ ने बताया कि वैसे तो घड़ियाल और मगरमच्छ के अंडो से बच्चों के निकलने का समय 70 से 83 दिन निर्धारित है लेकिन कतर्नियाघाट के मौसम में गर्मी अधिक होने के कारण बीते वर्षों में 65 से 78 दिन के अंदर अंडे से बच्चे निकले हैं।