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Bahraich News: नानपारा के तहसीलदार और लेखपालों में नोकझोंक, हंगामा

Sat, 24 Jan 2026 01:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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नानपारा तहसील में पत्रकारों से बातचीत करते तहसीलदार। -संवाद
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बहराइच/शिवपुर। नानपारा तहसील परिसर में शुक्रवार दोपहर बाद तहसीलदार रविकांत दुबे और लेखपालों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि तहसील परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। एक घंटे तक परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा। हाथापाई और धक्कामुक्की होने की भी चर्चा है।
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घटना उस समय हुई जब तहसीलदार अपनी अदालत में एसआईआर मामलों की सुनवाई कर रहे थे। उसी दौरान दो से तीन दर्जन लेखपाल उनके चैंबर में पहुंच गए, जहां दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। कुछ देर तक बहस चलती रही, जिससे न्यायिक कार्य भी प्रभावित हुआ।


लेखपाल प्रदीप आर्या ने बताया कि सुबह करीब 11:30 बजे तक तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित नहीं थे, जिसके बाद वह रोस्टर के अनुसार बनकटवा गांव में अंश निर्धारण कैंप में चले गए थे। इसके बाद उन्हें ग्राम पंचायत मैनहिया में प्रस्तावित विधायक कार्यक्रम में भी जाना था, जो बाद में रद्द हो गया। इसी दौरान तहसीलदार का फोन आया, जिसमें कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और तुम्हें ठीक कर दूंगा जैसी बात कही गई।
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प्रदीप आर्या के अनुसार जब वह तहसीलदार के चैंबर में पहुंचे, तो दोबारा इसी तरह की भाषा का प्रयोग किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि वह उनके अधीनस्थ हैं और कार्रवाई करनी है तो लिखित में करें। इसके बाद उन्होंने पूरी घटना की जानकारी लेखपाल संघ को दी, जिसके बाद संघ के सदस्य तहसीलदार से मिलने पहुंचे।


बताया गया कि उस समय तहसीलदार अपने कोर्ट के बाहर एसआईआर कोर्ट लगा रहे थे। इसके बाद कई लेखपाल और तहसीलदार उनके कार्यालय में गए, जहां काफी देर तक दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक के बीच हाथापाई और धक्कामुक्की होने की भी बात कही जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि कोई भी पक्ष नहीं कर रहा है।


सूचना मिलते ही सीओ पहुप सिंह और कोतवाल राजनाथ सिंह भारी दल-बल के साथ तहसील पहुंचे। सीओ ने बताया कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, तहसील परिसर में स्थिति काबू में है।

घटना के बाद तहसील के अन्य अधिकारी और कर्मचारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। वहीं तहसीलदार रविकांत दुबे ने छह दिन से गुप्त नवरात्र व्रत हूं, एसआईआर के अत्यधिक दबाव का हवाला देते हुए उन्होंने निर्णय जिलाधिकारी स्तर से होने की बात कही और वहां से चले गए।
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