मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट जंगल के भरथापुर गांव में हुए नाव हादसे के बाद विस्थापित आपदा-प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को बृहस्पतिवार को कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट बैठक में ग्राम भरथापुर के आपदा-प्रभावित परिवारों के विस्थापन एवं पुनर्वास के प्रस्ताव पर मुहर लगी। गांव के 136 परिवारों को अब सेमरहना गांव के निकट चयनित जमीन में बसाया जाएगा।
कैबिनेट निर्णय के तहत भरथापुर के 136 विस्थापित परिवारों को सुरक्षित, सुगम एवं स्थायी स्थान पर पुनर्वासित किया जाएगा। इसके लिए नानपारा–लखीमपुर हाईवे किनारे स्थित ग्राम सेमरहना में गाटा संख्या 4, रकबा 1.704 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। यहां प्रत्येक परिवार को 748 वर्गफुट का आवासीय भूखंड आवंटित किया जाएगा।
इस भूमि पर एक आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी, जिसमें सड़क, पेयजल, बिजली, नाली, स्ट्रीट लाइट, सीसी रोड सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत विस्थापित परिवारों को पक्के मकान भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिल सके।
ग्राम पंचायत सेमरहना की भूमि प्रबंधन समिति द्वारा पहले ही आवासीय पट्टा आवंटन का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से गति मिल गई है। शासन स्तर से बजट व अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियों की कार्यवाही तेज कर दी गई है।
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एक माह के भीतर नए स्थान पर बसाए जाएंगे विस्थापित
उपजिलाधिकारी मिहींपुरवा राम दयाल ने बताया कि कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी संबंधित विभागों को कार्ययोजना के क्रियान्वयन के आदेश दे दिए गए हैं। लक्ष्य है कि एक माह के भीतर विस्थापित परिवारों को नए स्थान पर बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए।
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नौ जिंदगियां हुई थीं खत्म
29 अक्तूबर को नौ जिंदगियों को लील लेने वाली नाव दुर्घटना के बाद उजड़े भरथापुर के परिवारों के लिए यह कैबिनेट निर्णय नई शुरुआत की उम्मीद बनकर आया है। हादसे के बाद गांव के लोग काफी निराश थे। अंतत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिहींपुरवा आकर भरथापुर गांव के लोगों को नए स्थान पर बसाने के निर्देश दिए थे। शासन और प्रशासन के समन्वित व संवेदनशील प्रयासों से अब भरथापुर वासियों को सुरक्षित, स्थायी और सुविधायुक्त जीवन मिलने की राह पूरी तरह प्रशस्त हो गई है।
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मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार मिलेंगी बहुआयामी सुविधाएं
- राजस्व विभाग: 136 परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा
- वन विभाग: प्रत्येक परिवार को 15 लाख रुपये की मुआवजा राशि
- लोक निर्माण विभाग : कॉलोनी तक चौड़ी व सुगम सड़क
- विकास विभाग: मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान
- पंचायत विभाग: ग्राम पंचायत सेमरहना के अभिलेखों में नामांकन
- शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग: बच्चों के लिए विद्यालय तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं
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वन विभाग के पैकेज के अतिरिक्त मिलेगा लाभ
जो परिवार पहले से अपने पुराने स्थान को खाली कर वन विभाग या अन्य विभागों को भूमि सौंप चुके हैं, उन्हें वन विभाग से मिलने वाले पैकेज के अतिरिक्त यह पुनर्वास सुविधा भी प्रदान की जाएगी। बता दें कि भरथापुर गांव एक ओर गेरुआ नदी और दूसरी ओर कौड़ियाल नदी से घिरा है। वहीं उत्तर दिशा में वन्य जीव क्षेत्र और नेपाल सीमा है। गांव तक सड़क मार्ग न होने के कारण लोगों को केवल नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता है, जिससे हर समय उनकी जान का खतरा बना रहता है।