फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रैन बसेरा व 20 दुकानें तोड़ीं

Sat, 22 Apr 2017 11:03 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
विज्ञापन
ढहाया रैन बसेरा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
शहर में रोडवेज परिक्षेत्र में बना अवैध निर्माण शनिवार को जेसीबी से ढहा दिया गया। साथ ही रोडवेज के सामने सड़क के उस पार स्थित 20 पक्की दुकानों को भी तोड़ा दिया गया, जिससे हड़कंप की स्थिति रही। अतिक्रमण हटाने का अभियान दोपहर बाद तक चला। पहले दिन की कार्रवाई के साथ ही प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को चेतावनी भी दी है। अपने आप अतिक्रमण न हटाने पर कार्रवाई करने की बात कही है। 
विज्ञापन


शहर में अतिक्रमण के चलते आए दिन जाम की स्थिति बनती है। चौक बाजार से रोडवेज तक के बीच आवागमन में लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं। रोडवेज पर स्थिति तो यह है कि सुबह से शाम तक हर समय जाम लगा रहता है। ट्रैफिक संचालन में भी मुश्किलें होती हैं। इस समस्या को देखते हुए चार दिन पूर्व अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन किसी ने भी अतिक्रमण नहीं हटाया।

इस पर सुबह नगर मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह, सीओ सिटी विजयशंकर मिश्र, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका पवन कुमार, दरगाह, कोतवाली नगर और देहात पुलिस टीम के साथ रोडवेज पहुंचे और रोडवेज बस अड्डे के ठीक सामने सड़क के उस पार स्थित 20 दुकानों को जेसीबी से ढहा दिया गया।
विज्ञापन


इसके अलावा रोडवेज परिसर में अवैध तरीके से निर्मित रैन बसेरे को भी ढहाया गया। दुकानों को ढहाने से अफरा-तफरी और विवाद की स्थिति रही। लेकिन पुलिस फोर्स के चलते किसी तरह अतिक्रमण हटाओ अभियान दोपहर बाद तक चला। 

नगर मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह ने बताया कि शहर के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमण हटाने के लिए मुनादी करवाई गई है। माइक से भी अनाउंस करवाया जा रहा है। सभी अतिक्रमणकारियों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर अतिक्रमणकारी अपना अतिक्रमण नहीं हटाएंगे तो अतिक्रमण हटाने के दौरान जेसीबी और मजदूर का जो भी खर्च होगा, उसका चार्ज अतिक्रमणकारी से लिया जाएगा।

रोडवेज के सामने ढहायी गई दुकानों को क्षेत्र के समाजसेवियों ने प्रशासन की तानाशाही बताया। ईंट निर्माता कल्याण समिति के महामंत्री मोहम्मद अब्दुल्ला, सलीम सिद्दीकी आदि की अगुवाई में दुकानदारों ने नगर मजिस्ट्रेट से तीखा विरोध जताते हुए उन्हें ज्ञापन सौंपा। कहा कि दुकानों का किराया नगर पालिका वसूलती थी। फिर दुकानें अवैध कैसे हो गईं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें