एलआईयू रिपोर्ट के बाद बढ़ी सतर्कता
इस मामले में एलआईयू ने मंडलायुक्त समेत अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर आगाह किया था कि हाईकोर्ट के आदेशों के तहत भीड़भाड़ वाले आयोजनों पर रोक है। ऐसे में उर्स का वृहद आयोजन कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट में बीते महीनों में अन्य स्थानों पर हुई सांप्रदायिक घटनाओं, विरोध प्रदर्शनों और हिंसक मामलों का हवाला देते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई थी।
मंडलायुक्त के निर्देश पर हुआ समाधान
एलआईयू की रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त शशि भूषण लाल ने जिला प्रशासन को मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन और दरगाह प्रबंधन समिति के बीच वार्ता हुई। वार्ता के बाद समिति ने हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में छह दिवसीय उर्स को घटाकर दो दिन का करने का निर्णय लिया।
यह है हाईकोर्ट का आदेश
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि दरगाह पर केवल आवश्यक और नियमित धार्मिक गतिविधियां ही सीमित संख्या में की जा सकती हैं। किसी भी प्रकार की भीड़भाड़ या ऐसा आयोजन, जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, उसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
भीड़ नियंत्रण के लिए लिखा पत्र
नगर मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि उर्स के दौरान किसी प्रकार का मेला आयोजित नहीं किया जाएगा। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस प्रशासन को पत्र भेजा गया है। सुरक्षा एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए दरगाह परिसर और आसपास बैरिकेडिंग की जाएगी, ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।