भारत-नेपाल सीमा से जुड़े रज्जनवा गांव में अंतर्राष्ट्रीय आवागमन का नया रास्ता खुलने जा रहा है। शासन ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी देते हुए प्रथम किश्त का बजट जारी कर दिया है। प्रवेश द्वार बनने के बाद जिले की सीमा पर दूसरा अधिकृत इंटरनेशनल गेट तैयार हो जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार तो बढ़ेगा ही आवागमन में भी सहूलियत होगी।
रुपईडीहा के बाद अब विकास खंड मिहींपुरवा के रज्जनवा में भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर का भव्य सीमा प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश शासन के अनुसचिव अभय प्रताप श्रीवास्तव ने इस मामले में 22 सितंबर को प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग को आदेश जारी किया था। परियोजना पर 1 करोड़ 53 लाख 35 हजार रुपये खर्च होंगे। शासन ने कार्य स्वीकृति के साथ प्रथम किश्त के रूप में 1 करोड़ 22 लाख 68 हजार रुपये का बजट जारी कर दिया है।
सीमाई व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद
प्रातीय खंड लोक निर्माण विभाग बहराइच के अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार ने बताया कि करीब 116 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा के बहराइच खंड में अब तक केवल रुपईडीहा में ही आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश द्वार मौजूद था।
रज्जनवा में दूसरा प्रवेश द्वार बनने से दोनों देशों के बीच वैध आवागमन, कारोबारी गतिविधियों और सीमाई व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव भेजा गया था उसका स्वीकृति पत्र मिला है निविदा की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद निर्माण कार्य को दिसबंर माह तक गति मिल सकेगी।
उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी द्वारा भेजी गई प्रस्तावित कार्य-योजना के तहत प्रवेश द्वार का निर्माण रज्जनवा एसएसबी चौकी के निकट कराया जाएगा। नेपाल की ओर से सड़क निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि भारत की ओर सड़क पहले से तैयार है। ऐसे में प्रवेश द्वार बनते ही इस मार्ग से सीमा पार आवाजाही का रास्ता साफ हो जाएगा।
रोटी-बेटी का संबंध होगा और सशक्त
सीमा क्षेत्र के स्थानीय व्यापारी, किसान एवं आम नागरिक इस पहल को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना रोटी-बेटी का संबंध इस प्रवेश द्वार से और अधिक सशक्त होगा।
साथ ही गुलरिहा (नेपाल) और मिहींपुरवा क्षेत्र में पर्यटन, बाजार और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश द्वार बनने के बाद सीमा सुरक्षा, आवागमन नियंत्रण और व्यापार संचालन की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित एवं सुगम हो जाएगी।