बहराइच। जिले में जल निकायों के संरक्षण और मानचित्रण से जुड़े मामले में बार-बार स्थगन मांगना राज्य प्राधिकारियों को भारी पड़ गया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), प्रधान पीठ नई दिल्ली ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या दो पर 20 हजार रुपये की लागत लगाई है। अधिकरण ने स्थगन मांगने के रवैये को बहुत ही लापरवाह बताया और इसे अंतिम अवसर मानते हुए अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की है।
मामले की सुनवाई 17 अगस्त 2026 को एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफ़रोज अहमद की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी, बहराइच और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण की ओर से फिर स्थगन की मांग की गई। इसके पीछे संबंधित विभाग से पूर्ण निर्देश प्राप्त नहीं होने का आधार बताया गया। अधिकरण ने पाया कि राज्य प्राधिकारियों की ओर से मामले में पहले भी कई बार स्थगन लिया जा चुका है।
इस पर अधिकरण ने प्रतिवादी संख्या दो की ओर से बार-बार स्थगन मांगने के रवैये पर नाराजगी जताई। हालांकि, अंतिम अवसर के रूप में स्थगन की अनुमति देते हुए 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। यह राशि 10 दिनों के भीतर एनजीटी बार एसोसिएशन में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।