बैराजों से लगातार छोड़ जा रहे पानी के कारण सरयू के जलस्तर में रविवार की शाम से वृद्धि दर्ज की जा रही है। जरवलरोड के एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर अधिक दर्ज किया गया। वहीं, तहसील महसी में जलस्तर घटने के बाद अब कटान तेज हो गई है जिससे ग्रामीणों में खौफ है। कटान प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों ने अपने हाथों से आशियाने तोड़ते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
वहीं, तहसील महसी के घरेहरा नकदिलपुर ग्राम पंचायत के प्रहलादपुरवा गांव निवासी राधेरमण उर्फ छोटू (22) रविवार की देर शाम गाय चराकर वापस आ रहा था। रास्ते पर भरे सरयू के पानी में वह डूबने लगा। बचाव के लिए शोर मचाने पर पशुओं को लेकर लौट रहे रानीबाग निवासी नरेंद्र सिंह ने पानी में छलांग लगा दी। उन्होंने किसी प्रकार युवक को बाहर निकाला। पुलिस कर्मियों ने उसे जिला चिकित्सालय भिजवाया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
तहसील महसी में सरयू का जलस्तर सोमवार को घटना शुरू हो गया, लेकिन जलस्तर घटने से कटान तेज हो गई है। ग्राम पंचायत टिकुरी के पसियनपुरवा में ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि भी नदी की जलधारा में समाहित होती जा रही है। कृषि योग्य भूमि के कटान के कारण नष्ट होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। कृषि योग्य भूमि के साथ ही तटवर्ती क्षेत्रों में बने ग्रामीणों के आशियानों पर भी संकट मंडरा रहा है। बीते तीन दिनों में ग्रामीण कुंवारे, सीताराम, पहलवान, ओमप्रकाश, बिहारी, जमींदार, तिलकराम व रामनिवास समेत 12 लोगों के आशियाने कटान की चपेट में आकर नष्ट हो चुके हैं।
कटान को देखते हुए ग्रामीणों ने आशियानों को अपने ही हाथों से तोड़ते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। उधर, जरवलरोड क्षेत्र स्थित एल्गिन ब्रिज पर सरयू नदी सोमवार की सुबह खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर अधिक पाई गई। सरयू के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है। जल मापक दुर्गा प्रसाद ने बताया कि सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, लेकिन अब जल स्तर स्थिर हो गया है।
यदि जल स्तर और बढ़ा तो ग्रामसभा अहाता के कई मजरे, तपेसिपाह के तीन मजरे व नासिरगंज के पांच मजरों समेत लगभग दस हजार की आबादी प्रभावित होगी। ऐसे में इन ग्राम सभाओं के ग्रामीण भी घाघरा के बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। हालांकि, नेपाल के पहाड़ों पर बरसात में कुछ कमी आने से बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी में भी कुछ कमी दर्ज की गई है इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि पहाड़ों पर आगामी कुछ दिनों तक भारी बरसात न हुई तो बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में भी कमी आएगी। ऐसे में धीरे-धीरे नदी का जलस्तर पूर्ववत हो जाएगा।
तहसील कैसरगंज और महसी के निवासी प्रतिवर्ष बाढ़ की विभीषिका का सामना करते हैं। तटवर्ती ग्रामों में नदी प्रतिवर्ष काफी कटान करती है। बीते लगभग दस वर्षों से यही क्रम चला आ रहा है। कृषि योग्य भूमि नदी की जलधारा में समाती देख ग्रामीण भी काफी मायूस नजर आ रहे हैं। वहीं, कड़ी मशक्कत कर एक-एक पैसा जमा करने के बाद बनवाए गए आशियानों को अपने हाथों से तोड़ते हुए भी लोगों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। इस वर्ष भी अपना आशियाना अपने हाथों तोड़कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की जद्दोजहद में ग्रामीण जुट गए हैं। जिले में स्थित तीनों बैराजों से सोमवार को दो लाख, 99 हजार, 138 क्यूूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें शारदा बैराज से एक लाख, 46 हजार, 172 क्यूसेक, गिरिजापुरी बैराज से एक लाख, 50 हजार, 636 व सरयू बैराज से दो हजार, 330 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
दिया जाएगा मुआवजा
युवक की मौत की घटना का पता चला है। राजस्व लेखपाल को मौके पर भेजा जा रहा है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद दैवीय आपदा राहत कोष से अहेतुक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जिन ग्रामीणों के मकान कटाने की चपेट में आने से नष्ट हुए हैं उन्हें भी मुआवजा प्रदान किया जाएगा। रामदास, एसडीएम, महसी।