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विधायक से सिफारिश कराने पर ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित

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बहराइच। तबादले के लिए सत्ता पक्ष के एक विधायक से सिफारिश कराना ग्राम पंचायत अधिकारी को महंगा पड़ गया। नीचे के अधिकारियों ने सिफारिश पर उसका स्थानांतरण कर दिया, लेकिन मामला संज्ञान में आने पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने उसे निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई जबकि वह ग्राम पंचायत अधिकारी संघ का जिलाध्यक्ष भी है। यही नहीं ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के महामंत्री को भी डीपीआरओ ने निलंबित किया है। संघ के महामंत्री बतौर ग्राम पंचायत अधिकारी चित्तौरा में तैनात थे। उन पर योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। दो महत्वपूर्ण पद धारकों के खिलाफ कार्रवाई से संगठन में गुस्सा है। चर्चा है कि यह मुद्दा बन सकता है।
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जिला पंचायत राज अधिकारी उमाकांत पांडेय ने जारी पत्र में बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारी जरवल सुनील कुमार वर्मा अपने स्थानांतरण के संबंध में राजनीतिक दबाव डलवा रहे थे। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के 15 जून के आदेशों के क्रम में यह सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 के नियम सात का उल्लंघन है। ऐसे में सुनील कुमार को निलंबित किया जा रहा है। गौरतलब है कि सुनील वर्मा ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष हैं।
दूसरी कार्रवाई ग्राम पंचायत अधिकारी भीम सिंह के खिलाफ की गई है। एक शिकायत में सहायक विकास अधिकारी कैसरगंज की जांच में सामने आया था कि भीम सिंह ने अपने पूर्व तैनाती स्थल ग्राम उमरी के प्राथमिक विद्यालय व पूर्व माध्यमिक विद्यालय का कायाकल्प कराए बिना ही एक लाख, 51 हजार रुपये का भुगतान करा लिया था। इसके बाद भी 80 हजार रुपये का भुगतान करा लिया गया था। इस आरोप में डीपीआरओ उमाकांत पांडेय ने भीम सिंह को निलंबित कर दिया। दूसरे विभागों से जुड़े संगठनों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के विरोध में बैठक बुलाई जाएगी।
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सुनील वर्मा ने कहा कि तीन वर्ष पर तबादले का शासनादेश है। वह शिवपुर में मात्र डेढ़ वर्ष तक ही तैनात रहे। इसके बाद जरवल के लिए तबादला कर दिया गया। फिर शिवपुर वापस आए तो निलंबित कर दिया गया। पहला तो यह शासनादेश का उल्लंघन है और दूसरा संगठन का जिलाध्यक्ष होने के नाते जिलाधिकारी से अनुमोदन लेना आवश्यक है। डीपीआरओ ने जिलाधिकारी से अनुमोदन लिए बिना निलंबित कर दिया है इसलिए लड़ाई लडे़ंगे। उधर, भीम सिंह ने बताया कि कार्रवाई राजनीतिक है। सारे आरोप फर्जी हैं।
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