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21 साल बाद पत्नी के हत्यारे को आजीवन कारावास

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बहराइच। खैरीघाट थानाक्षेत्र में पत्नी के दहेज उत्पीड़न व हत्या के मामले में बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी ने पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अन्य अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।
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एडीजीसी क्रिमिनल फिरोज अहमद खां ने बताया कि 6 मई, 2001 को थाना नानपारा के भरिया गांव निवासी देवेंद्र प्रसाद शुक्ला ने अपनी 22 वर्षीय बेटी मनोज कुमारी की दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाते हुए थाना खैरीघाट में पति मुरली उर्फ श्रवण कुमार, देवर मस्तू उर्फ राजकुमार, सास चंद्रावती व ससुर लालजी शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी नितिन पांडेय ने बुधवार को सत्र परीक्षण के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता गयाप्रसाद मिश्रा व अभियोजन पक्ष की बहस सुनने के बाद 21 साल पुराने मुकदमे में फैसला सुनाया।
एडीजीसी ने बताया कि मुकदमे के दौरान ससुर लालजी शुक्ला की मृत्यु हो जाने के बाद उनके विरुद्ध वाद की कार्रवाई उपशमित कर दी गई। न्यायाधीश ने साक्ष्य के अभाव में सास व देवर को दोषमुक्त कर दिया। उन्होंने बताया कि बहस के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश ने मुरली को दोष सिद्ध करार देते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। एडीजीसी क्रिमिनल ने बताया कि मामले में न्यायाधीश ने अभियुक्त को 50 हजार के अर्थदंड से दंडित भी किया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थित में एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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