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2007 में सरताज और 2022 में साफ

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बहराइच। विधानसभा चुनाव में वर्ष 2007 के बाद जिले में बसपा का जनाधार धीरे-धीरे खिसकता चला गया। मतदाताओं ने बसपा को वर्ष 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव में नकारते हुए वर्ष 2022 में पूरी तरह खारिज कर दिया।
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वर्ष 2007 के चुनाव में जिले में छह विधानसभा की सीटें थीं। चुनाव में बसपा की लहर के दौरान जिले की नानपारा सीट से वारिस अली 36.38 प्रतिशत वोट पाकर सदन तक पहुंचे थे। इसके अलावा फखरपुर सीट से कृष्ण कुमार ओझा 31.84 प्रतिशत और कैसरगंज सीट से गुलाम मोहम्मद खान ने 34.19 प्रतिशत वोट पाकर सदन तक पहुंचने में कामयाबी पाई थी। 2007 में जिले की सदर व महसी सीट पर बसपा दूसरे व चर्दा में तीसरे स्थान पर थी। उसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में हुए नए परिसीमन के बाद चर्दा व फखरपुर सीट समाप्त कर मटेरा, बलहा व पयागपुर सीट अस्तित्व में आई थी। वर्ष 2012 के चुनाव में चली सपा की लहर में बसपा को महज महसी की सीट पर सफलता मिली थी।
यहां से कृष्ण कुमार ओझा एक बार फिर चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे थे जबकि बलहा में बसपा दूसरे और जिले की पांच सीटों पर तीसरे स्थान पर पहुंच गई थी। 2017 में चली भाजपा की आंधी में बसपा सीटों के मामले में शून्य पर पहुंच चुकी थी। इस चुनाव में बसपा कैसरगंज व बलहा की सीट पर उपविजेता जरूर रही थी जबकि पांच विधानसभा सीटों पर तीसरे नंबर पर हांफती दिखाई दी, लेकिन वर्ष 2022 के चुनाव में बसपा पूरी तरह चित नजर आई। जिले की सभी सीटों पर बसपा को बुरी तरह पराजय का सामना करना पड़ा।
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