फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाकिस्तानी व बांग्लादेशी छात्र भारत का झंड़ा लेकर बॉर्डर कर रहे पार

विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। यूक्रेन में हालात बहुत खराब हैं। युद्ध शुरू के बाद सभी लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। फंसे हुए लोगों को उम्मीद नहीं है कि वे अपने घर सुरक्षित पहुंच पाएंगे, लेकिन भारत के लोग इस मामले में भाग्यशाली हैं। सरकार की पहल व तिरंगा झंडा न सिर्फ भारतवासियों के लिए वरदान साबित हुआ है बल्कि पाकिस्तान व बांग्लादेशी छात्रों के लिए भी ढाल बना हुआ है। पाकिस्तान व बांग्लादेशी झंडा उठाने पर उन्हें रोका जा रहा है। वहां की फोर्स से बचने के लिए हर कोई भारत का झंडा लेकर ही बॉर्डर पार कर रहा है। भारत के झंडे को लेकर निकल रहे लोगों को काफी सहूलियत मिल रही है। ये बातें यूक्रेन से लौटे छात्र रविंद्र कुमार शुक्ला ने बताई। उन्होंने कहा कि देश के लिए विदेश में यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से है। वहां के लोग बीते कुछ सालों में भारतीयों को विशेष सम्मान देने लगे हैं।
विज्ञापन

देहात कोतवाली क्षेत्र के रायपुर राजा मोहल्ला निवासी रवींद्र शुक्ला पुत्र योगेंद्र शुक्ला यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। रवींद्र पिछले कई दिनों से रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वहां फंसे थे। शुक्रवार की दोपहर वह अपने घर पहुंचे। यूक्रेन से घर पहुंचे योगेंद्र ने आपबीती सुनाई तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। छात्र ने बताया कि हम लोग एकदम बीच में फंसे हुए थे। लग नहीं रहा था कि वापस घर पहुंच पाएंगे तभी भारतीय दूतावास का संदेश मिला और हम लोग रोमानिया बॉर्डर के लिए रवाना हुए। रास्ते में बमबारी हो रही थी, लेकिन रूस के लोग भारतीय लोगों का काफी सम्मान कर रहे थे। हम लोग अपनी बसों के आगे-पीछे अपना प्यारा तिरंगा झंडा लगाए हुए थे जिससे रास्ते में कोई परेशानी नहीं हुई। वहां की मिलिट्री के जवान भी झंडा देखने के बाद गलत बर्ताव नहीं कर रहे थे। छात्र ने बताया कि यह देखकर पाकिस्तान व बांग्लादेश के कुछ छात्र भी भारत का झंडा लेकर बॉर्डर पार कर गए। अन्य देशों के लोगों को मिलिट्री के जवान रोकते नजर आए। वहां पर भारत के तिरंगे का बड़ा सम्मान है। गर्व हुआ कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और हम भारतीय हैं।
छात्र रविंद्र ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचने के बाद तीन दिन तक हम लोग फंसे रहे। तीन दिन तक खाने व पीने के लिए कुछ भी नहीं मिला। जब हम लोगों को भारत के अधिकारी मिले तब जाकर जान में जान आई और एहसास हुआ कि अब हम अपने घर वापस सुरक्षित पहुंच पाएंगे। छात्र ने बताया कि हम लोगों के साथ ही एक बांग्लादेशी छात्र भी फ्लाइट से वहां से आया है। अब हो सकता है कि भारत से उसे बांग्लादेश भेजा जाए।
विज्ञापन

छात्र ने बताया कि जब हम लोग बॉर्डर पार कर रहे थे तो लगभग-लगभग हर घंटे बंकर में छुपना पड़ता था। कभी मिलिट्री के जवानों के आने की सूचना मिलती तो कभी बमबारी की। हर समय खतरा बना हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें