बहराइच। लूट, अपहरण समेत अन्य धाराओं में दर्ज मुकदमों के आरोपी जिला पंचायत सदस्य व उनके सहयोगी को आखिरकार एसटीएफ के सहयोग से नगर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी बीते कई माह से फरार चल रहे थे। पुलिस की पकड़ से दूर होने के कारण डीआईजी के बाद एडीजी ने इनाम की धनराशि बढ़ाकर एक लाख कर दी थी जबकि इनके सहयोगी के ऊपर भी 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। दोनों को एसटीएफ व नगर कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों को बहराइच लाकर जेल भेज दिया गया।
पयागपुर थाना क्षेत्र के मोहनमाफी गांव निवासी देवेंद्र सिंह उर्फ गब्बर सिंह जिला पंचायत सदस्य हैं। गब्बर व इनके सहयोगी मनीष जायसवाल के खिलाफ लूट व अपहरण समेत अन्य धाराओं में लखनऊ, फैजाबाद, गोंडा समेत अन्य जिलों में मुकदमा दर्ज है। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने गिरफ्तारी न होने पर जिपं सदस्य गब्बर के खिलाफ 50 हजर का इनाम घोषित किया था। इसके बावजूद गिरफ्तारी नहीं हो सकी। फरार चल रहे गब्बर की गिरफ्तारी न होने पर एडीजी अखिल कुमार ने इनाम की धनराशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख कर दी। मनीष के ऊपर भी 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया।
सूचना मिली कि दोनो आरोपी लखनऊ में मौजूद हैं। सूचना पर जिले की नगर कोतवाली की पुलिस कोतवाल राजेश कुमार के साथ लखनऊ पहुंची। लखनऊ में एसटीएफ की टीम के उप निरीक्षक पवन कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल रमाशंकर चौधरी, आलोक कुमार और शैलेंद्र के साथ पीजीआई की स्टाफ पार्किंग में पहुंचे। यहां दोनों आरोपी मौजूद मिले। टीम ने मौके से दोनों को दबोच लिया। जिले की टीम आरोपियों को जिला मुख्यालय लाई। सीओ सिटी विनय द्विवेदी ने बताया कि दोनों को जेल भेज दिया गया।
कोतवाली नगर के मोहल्ला कानूनगोपूरा दक्षिणी निवासी गुरुप्रीत सिंह पुत्र जसवीर सिंह ने हाल में ही कूटराचित दस्तावेज से जमीन का बैनामा कराने समेत चार धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। उसके बाद से पुलिस दबिश दे रही थी। गब्बर के खिलाफ 56 मुकदमे दर्ज है। ये मुकदमे जिले के अलावा लखनऊ, गोंडा, फैजाबाद व सुल्तानपुर में दर्ज हैं। मामले में एसपी केशव चौधरी ने कहा कि चुनाव से पहले सभी अपराधियों को जेल भेजने का काम किया जाएगा। अपराधियों की सही जगह जेल में ही है।