बहराइच। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए भले ही स्वास्थ्य महकमा तैयारियों में जुटा हो, लेकिन मेडिकल कॉलेज में लापरवाही की तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर में 50 प्रतिशत से अधिक लोग बिना मास्क के घूमते नजर आए। सोशल डिस्टेसिंग की तो हर जगह धज्जियां उड़ रही हैं। फिर चाहे दवा का काउंटर हो या फिर चिकित्सकों के ओपीडी का कक्ष।
इमरजेंसी कक्ष से लेकर चिकित्सकों के कक्ष तक अधिकतर मरीज बिना मास्क के ही इलाज करा हैं। बावजूद इसके कोई भी चिकित्सक मास्क लगाने की बात नहीं कह रहा है। अगर ऐसा ही हाल रहा तो कोरोना फिर से दस्तक दे सकता है। कुछ ऐसा ही नजारा पर्चा काउंटर व दवा वितरण कक्ष में भी देखने को मिला। यहां पर भी लोग बिना मास्क के पर्चा बनवाते रहे और दवा लेने के लिए लाइन में खड़े रहे। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने मेडिकल कॉलेज परिसर का भ्रमण किया तो लगभग 50 प्रतिशत से अधिक लोग बिना मास्क के ही नजर आए। यह लापरवाही मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों व तीमारदारों की जान पर भारी पड़ सकती है।
कोरोना से बचाव के लिए बनाया गया नारा दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी सिर्फ कागजों की ही शोभा बढ़ा रहा है। मेडिकल कॉलेज परिसर में कहीं पर भी सोशल डिस्टेसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है। फिर चाहे चिकित्सक हों या स्वास्थ्य कर्मी। चिकित्सक के मुंह पर मास्क लगा भी दिखा तो नाक के नीचे तक।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में घोषणा कराई जा रही है। चिकित्सकों को भी निर्देेश दिया गया है कि बिना मास्क पहने मरीजों को न देखें। मरीजों को भी जागरूक करें।
- डॉ. ओपी पांडेय, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज, बहराइच