बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट रेंज के अंतर्गत बहने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदी एक बार फिर पूरी तरह सूख चुकी हैं। इसके कारण जलीय जीवों का भी पलायन शुरू हो गया है। फिलहाल अब एक माह तक तक पर्यटक डाल्फिन की चहलकदमी नहीं देख सकेंगे।
चौधरी चरण सिंह घाघरा बैराज 11 अक्तूबर से छह नवंबर तक के लिए गेटों का क्लोजर कर कौड़ियाला और गेरुआ नदी का पानी घाघरा में छोड़ दिया गया है। बैराज प्रभारी संतराम वर्मा ने बताया कि गेटों की मरम्मत आदि का कार्य पूरा हो जाने तक छह नवंबर को गेटों को डाउन कर क्लोजर खत्म कर दिया जाएगा। जिससे दो से तीन दिन में पुन: जंगल की नदियों गेरुआ और कौड़ियाला में पानी एकत्रित हो जाएगा। बता दें कि क्लोजर के चलते कतर्निया जंगल की नदी पूरी तरह सूख चुकी है। सिर्फ नदी में गहराई वाले स्थानों पर पानी एकत्रित है, जिससे जलीय जीव अपना गुजारा कर रहे हैं।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी ने बताया कि कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में डाल्फिन की संख्या अधिक पाई जाती है। क्लोजर के समय डाल्फिन का समूह घाघरा के डाउन स्ट्रीम की ओर से चला जाता है। और क्लोजर खत्म होते ही डाल्फिन वापस गेरुआ नदी में आ जाती है।
बैराज का क्लोजर वर्ष में तीन से चार बार गेटों की मरम्मत, पेंटिंग आदि के लिए किया जाता है। क्लोजर के दौरान बैराज के सभी गेटों को खोल दिया जाता है, जिससे गेरुआ और कौड़ियाला में एकत्रित पानी घाघरा की ओर बह जाता है। वहीं क्लोजर खत्म करते ही बैराज के सभी गेट डाउन किए जाते है, जिससे गेरुआ और कौड़ियाला नदी का पानी एक बार फिर एकत्रित होने लगता है।
कतर्निया घाट में पर्यटन सत्र की शुरुआत इस बार 15 दिन पहले यानी एक नवंबर को होना तय किया गया है, लेकिन पर्यटकों के लिए चिंता की खबर यह है कि वह अब पर्यटन सत्र के करीब एक सप्ताह तक वोटिंग का आनंद नहीं ले पाएंगे। क्योंकि घाघरा बैराज पर किया गया क्लोजर छह नवंबर तक जारी रहेगा। बैराज प्रभारी के मुताबिक छह नवंबर तक क्लोजर खत्म कर गेटों को डाउन किया जाएगा, जिससे धीरे-धीरे गेरुआ में पानी एकत्रित होने लगेगा। ऐसे में तीन से चार दिन में वोटिंग के लिए पानी एकत्रित हो जाएगा।