फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जमोगा के चक्कर में मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़

विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। गिलौला निवासी एक ग्रामीण के शिशु का हाथ काला पड़ने लगा। पड़ोसी महिलाओं ने भूत-प्रेत की बात कहते हुए खौलते तेल की कड़ाही में उसकी अंगुली डालने की बात कही। महिला ने ऐसा ही किया जिससे शरीर में इंफेक्शन फैल गया। नवजात की मौत हो गई। इसी तरह चित्तौरा और नेपाल निवासी नवजात के परिवार के लोगों ने किया। दरअसल, ऐसा अंधविश्वास के चलते किया जाता है। अंधविश्वास है कि ऐसा करने से जमोगा यानी भूत-प्रेत की बाधा दूर होती है। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि इलाज कराएं। झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें।
विज्ञापन

नवजात में किसी भी तरह के संक्रमण की आशंका होने पर परिवार वाले भूत-प्रेत की बाधा समझकर उसकी अंगुली खौलते तेल में डालकर दाग देते हैं। विश्वास है कि इससे उनका बच्चा सदा संक्रमण मुक्त रहेगा। उनका यही विश्वास उस समय तार-तार हो जाता है जब नवजात की जली उंगली संक्रमित होकर सड़ने लगती है और झाड़-फूंक के चक्कर में संक्रमण फैलकर नवजात की जान ले लेता है। कुछ यही मामला श्रावस्ती जिले के गिलौला निवासी एक परिवार में देखने को मिला। मेडिकल कॉलेज के महर्षि बालार्क जिला चिकित्सालय में एक महिला अपने नवजात बच्चे को लेकर आई। उसकी बीमारी और उसके द्वारा किए गए कृत्य को जानकर चिकित्सक भी हतप्रभ रह गए। शिशु की मां ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि उसके शिशु का शरीर नीला पड़ गया था।
परिवार की कुछ महिलाओं ने इसे जमोगा यानी भूत-प्रेत बताया। इससे निजात पाने के लिए खौलते तेल में शिशु की उंगली डाल दी। इसकी वजह से उंगली में सड़न पैदा हो गई। इसके बाद उसे बहराइच मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया जहां वह जिंदगी की जंग हार गया। इसी तरह चित्तौरा विकास खंड अंतर्गत अमीनपुर नगरौर और नेपाल के बांके जिला निवासी एक परिवार की भी स्थिति रही है। चिकित्सकों की सलाह पर दोनों नवजात को इलाज के दौरान ही लेकर घर चले गए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एसके सिंह ने बताया कि नवजात को किसी भी तरह की समस्या होने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज संभव है। उन्होंने अपील की है कि किसी के बहकावे में न आयें। जमोगा नाम की कोई बीमारी नहीं होती है। गर्म तेल में नवजात की उंगली न डालें। इससे उंगली सड़ सकती है और बच्चे की जान भी जा सकती है।
विज्ञापन

तेजवापुर के यादवपुर निवासी सतगुर मौर्या 50 वर्ष के हैं । उनके दाहिने हाथ की छोटी उंगली आधी कटी हुई है। वह बताते हैं कि जमोगा ( भूत-प्रेत या लाग बाधा ) भागने के लिए उनकी सगी बुआ ने खौलते तेल में उनकी उंगली डाल दी थी। बाद में सड़न पैदा होने की वजह से उनकी आधी उंगली काटनी पड़ी थी।
मेडिकल कालेज के सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट के इंचार्ज और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ असद अली ने बताया कि महीने में एक या दो ऐसे केस आते हैं। कई शिशु तो इस हालत में भर्ती होते हैं जिनकी पूरी हथेली सड़ चुकी होती है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं में संक्रमण के सामान्य खतरे के लक्षणों को जमोगा बीमारी समझना गलतफहमी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें