बहराइच। एक तरफ सरकार गरीबों को निशुल्क इलाज देने के लिए गोल्डेन कार्ड बनवा रही है। सरकारी अस्पतालों में तमाम सुविधाएं दे रही है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से इस मंशा को पलीता लग रहा है। नतीजा यह है कि इलाज के लिए किसानों के खेत बिक रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जिले में भी सामने आया है। सधुवापुर निवासी एक ग्रामीण की किडनी खराब है। मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस की सुविधा होने के बाद भी उसका इलाज नहीं हो पा रहा है, क्योंकि मशीन की मोटर खराब होने से यह शोपीस बनी हुई है। तीन वर्ष में इलाज के लिए ग्रामीण का दो बीघा खेत और एक मकान बिक चुका है। ग्रामीण के मुताबिक प्रति माह उसके इलाज पर लगभग 20 हजार रुपये खर्च हो रहा है। ऐसे में मेडिकल कालेज में स्थापित डायलिसिस मशीन शो पीस बनकर रह गया है।
जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महर्षि बालार्क जिला चिकित्सालय में सरकार की ओर से सभी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। दो वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में डायलिसिस मशीन की स्थापना हुई थी। स्थापना के दौरान कोरोना की पहली लहर में महिला समेत कई लोगों की डायलिसिस भी कराई गई। इससे जिलेवासियों में मुख्यालय पर ही बेहतर इलाज की आस जगी थी, लेकिन कुछ ही समय में यह मशीन ठप हो गई और मरीजों की उम्मीद पर पानी फिर गया। तमाम मरीजों को मशीन का काम न करना काफी महंगा पड़ रहा है। हरदी थाना क्षेत्र के सधुवापुर गांव निवासी बिहारीलाल पुत्र संतलाल भी इनमें शामिल हैं। बिहारीलाल की किडनी खराब है।
वह तीन वर्ष से लखनऊ में डायलिसिस व अन्य इलाज करा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में बिहारीलाल की डायलिसिस नहीं हो पा रही है। इसके लिए वह हर सप्ताह लखनऊ का चक्कर लगाते हैं। बिहारी लाल ने बताया कि हर पांचवें दिन डायलिसिस के लिए लखनऊ जाना पड़ता है जिससे प्रति माह 20 हजार रुपये खर्च आ रहा है। महर्षि बालार्क जिला अस्पताल में स्थापित डायलिसिस यूनिट धूल फांक रही है। वहीं, प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड बना होने के बाद भी ग्रामीण को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
सधुवापुर गांव निवासी बिहारीलाल ने फफकते हुए बताया कि तीन साल से वह किडनी का इलाज करा रहे हैं। लखनऊ आने-जाने में काफी खर्च होता है। खर्च पूरा करने के लिए दो बीघा खेत व एक मकान भी बिक गया है। अब परिवार काफी परेशान है।
कोरोना काल के पहले चरण में जिले के किडनी रोगियों की डायलिसिस लखनऊ में बिना आरटीपीसीआर जांच के नहीं होती थी। ओपीडी भी बंद थी। इसको देखते हुए डायलिसिस यूनिट स्थापित की गई थी। अभी यूनिट की मोटर खराब है। इसके लिए पत्र लिखा गया है।
- डॉ. ओपी पांडेय, सीएमएस, बहराइच
प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आयुष्मान कार्ड से कैंसर, हार्ट, बुखार व विभिन्न ऑपरेशन की सुविधा है। इसका लाभ कार्डधारकों को मिल रहा है जबकि किडनी के इलाज या बदलने के लिए कोई सुविधा नहीं है।
डॉ. पीयूष मिश्रा, जिला समन्वयक, गोल्डन कार्ड