रिसियामोड़ (बहराइच)। शहनवाजपुर व आसपास के इलाकों में ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन कराए जाने का मामला अब और तूल पकड़ गया है। शनिवार को एडीएम व एएसपी ने गांव पहुंचकर घटना की जानकारी ली। देर शाम पूर्व प्रधान ने तहरीर दी जिस पर रिसिया थाने में दिल्ली के पास्टर समेत पांच लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
रिसिया थाना क्षेत्र के शहनवाजपुर और आसपास के गांवों में इसाई मिशनरियों के द्वारा लोगों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। इसका आरोप पूर्व ग्राम प्रधान अनिल निषाद ने लगाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया था। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों के लोग भी गांव पहुंच गए थे। सभी में आक्रोश देखा जा रहा था। पुलिस ने पहले मामले से किनारा कस लिया था। लेकिन जिलाधिकारी दिनेश चंद्र के सख्त रुख के बाद शनिवार को अपर जिलाधिकारी जयचंद्र पांडेय और अपर पुलिस अधीक्षक नगर कुंवर ज्ञानंजय सिंह गांव पहुंचे। गांव के लोगों से इसके बारे में जानकारी ली। पूर्व प्रधान अनिल निषाद ने बताया कि दिल्ली के पास्टर रंजीत कुमार, लखीमपुर के पलिया निवासी मनोज कुमार के माध्यम से रिसिया इलाके में धर्म परिवर्तन कराए जाने का मिशन चला रहे थे।
इसमें शहनवाजपुर के रहने वाले इंद्रजीत, लालबहादुर और प्रह्लाद भी शामिल थे। सभी के द्वारा चंगाई सभा और कैलशिया प्रार्थना कराई जाती थी। चंगाई सभा में उपदेश दिए जाते थे। जबकि कैलशिया प्रार्थना में लोग पहुंचकर पूजा अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करते थे। इस मिशन के बारे में पुलिस को जानकारी दी गई। पूर्व प्रधान ने बताया कि पास्टर समेत पांच लोगों को नामजद करते हुए तहरीर दी गई है। एएसपी नगर ने बताया कि तहरीर मिली है। उसी के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
धर्म परिवर्तन के मामले को लेकर प्रशासन और आरएसएस के आनुषंगिक संगठन आमने-सामने आ गए हैं। हिंदू संगठन से जुड़े जितेश्वर, अंबिका प्रसाद, संजीव श्रीवास्तव आदि पदाधिकारियों ने कहा कि 17 अगस्त को रामनगरी अयोध्या में संघ परिवार की बड़ी बैठक होने जा रही है। इस बैठक में बहराइच के रुपईडीहा और रिसिया समेत अन्य इलाकों में चल रहे धर्मांतरण का मुद्दा पूरे जोर शोर से उठाया जाएगा। सभी ने कहा कि इसे रोका जाना बेहद जरूरी हो गया है। इसाई मिशनरियां ग्रामीणों को प्रलोभन देकर इसाई बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
पूर्व प्रधान अनिल निषाद शनिवार को रिसिया थाने पहुंचे थे। थाने में उनको लगभग चार घंटे तक बैठाए रखा गया। पूर्व प्रधान का आरोप है कि सोशल मीडिया पर डाली गई उनकी पोस्ट को जबरन डिलीट करा दिया गया। इसमें विजिलेंस और सुरक्षा एजेंसियों के लोग भी शामिल थे। उनके ट्विटर अकाउंट और व्हाट्सएप को भी डिलीट कर दिया गया है। इस बारे में एसओ हेमंत गौड़ का कहना है कि किसी भी तरह के भड़काऊ पोस्ट को वायरल नहीं किया जा सकता है। पुलिस जो भी कार्रवाई कर रही है, वह समाज की आंतरिक सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है।