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हाईवे पर 20 ब्लैक स्पॉट, संभलकर करें सफर

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29 बीएचआर 24 - एडवायजरी- बहराइच-गोंडा हाईवे पर स्थित दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। सुगम सफर व जिंदगी की सुरक्षा के लिए जागरूक होना जरूरी है। बेहतरीन सड़कों पर नियमों की अनदेखी जीवन पर भारी पड़ रही है। सुरक्षा के लिए तैनात रिस्पांस टीम भी मौके पर पहुंचने के बजाय कागजों मे कोरम पूरा करने में आगे है। हाईवे पेट्रोलिंग घटना की सूचना के 20 मिनट के अंदर पहुंचने का दावा करती है, लेकिन यह दावा हादसे के समय खोखला साबित हो जाता है। जिले में 20 स्थानों पर जान का खतरा हमेशा बना रहता है। ये वो स्थान हैं जहां हाईवे पर कोई सड़क आकर मिलती है। ऐसे प्वाइंट को जंक्शन बोला जाता है। यहां हादसों का मुख्य कारण डेवलेपमेंट न होना है। हाईवे की देखरेख की जिम्मेदारी उठाने वाले अधिकारी जल्द ही डेवलेपमेंट कराकर हादसे रोकने का दावा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान ओवर स्पीड व गलत पार्किंग पर नियंत्रण जरूरी है।
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बाराबंकी जिले में अयोध्या-लखनऊ हाईवे पर रामसनेहीघाट पर हुए सड़क हादसे में एनएचएआई की पेट्रोलिंग टीम की लापरवाही सामने आई है। पेट्रोलिंग का दावा करने वाली टीम सूचना के बाद भी नहीं पहुंची। इसी तरह बहराइच जिले में लगभग 20 स्थानों पर ब्लैक स्पॉट चिन्ह्ति किया गया है, लेकिन उन पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। आए दिन लोगों को सड़क हादसे में जान गवां कर इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। हाईवे पर सड़क हादसे का सबसे बड़ा कारण जंक्शन पर काम पूरा कार्य न होना बताया जा रहा है। गांवों से हाईवे पर निकलने वाली सड़कों को सीधे जोड़ दिया गया है। न तो कोई साइन बोर्ड लगाया गया है और न ही उसका चौड़ीकरण कराया गया है जिसके चलते वाहन ओवरस्पीड में ही गाड़ी को लेकर क्रॉस करने का प्रयास चालक करते हैं और सड़क हादसे का शिकार हो जाते हैं। जिले में एनएचएआई के दो पेट्रोलिंग वाहन हैं। एक कैसरगंज टोल प्लाजा पर मौजूद रहता है और दूसरी नानपारा टोल प्लाजा पर। एनएचएआई के अधिकारियों का दावा है कि रात में पेट्रोलिंग की जाती है। घटना की सूचना पर 20 मिनट के अंदर सहायता करने के लिए वाहन पहुंच जाता है।
जिले में लगभग 20 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए है। इनमें लखनऊ मार्ग पर जरवल, घाघराघाट, देखलखा, बढ़ौली व टिकोरामोड़ हैं। गोंडा मार्ग पर नगरौर, कोल्हुवा, खुटेहना व विशेश्वरगंज हैं। नानपारा मार्ग पर झिंगहाघाट, रिसियामोड़ व नानपारा बाईपास समेत अन्य स्थान है।
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जिले में डग्गामार वाहनों का बोलबाला है। आलम यह है कि इस वजह से आए दिन सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ी रहती है। बसों में क्षमता से ज्यादा से यात्रियों को बैठाकर ले जाया जाता है। जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। डग्गामार वाहनों पर एआरटीओ पूरी तरह मेहरबान है। यही कारण है कि रोजाना सैकड़ों बसें निकल रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
20 जुलाई को नानपारा-रूपईडीहा हाईवे पर डबल डेकर बस पलटी थी, जिसमें क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। यात्रियों ने शीशा तोड़कर बाहर निकले थे और अपनी जान बचाई थी। तीन दिन बाद यानी 23 जुलाई को रूपईडीहा के भवनियापुर में बस अनियंत्रित होकर पलट गई थी। उसमें भी क्षमता से ज्यादा सवारी बैठी थी। दोनों मामलों में अब तक कोई कार्रवाई परिवहन विभाग की ओर से नहीं की गई है।
सड़क हादसों को रोकने के लिए सांकेतिक बोर्ड व साइन बोर्ड लगाए गए हैं। लोगों से वाहन को ओवरस्पीड में न चलाने की अपील की जा रही है। कनेक्टिंग रोड पर चौड़ाई कम है। इसका कार्य एक सप्ताह के अंदर शुरू कराया जाएगा। जंक्शन पर कार्य करवाने के बाद एक अलग रूप दिया जाएगा जिससे हादसे रोके जा सकेंगे।
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- प्रमोद यादव, रेजीडेंस इंजीनियर, एनएचएआई, बहराइच
एनएचएआई का इमरजेंसी नंबर- 1033
वर्ष दुर्घटना मृतकों की संख्या घायल
2017 280 183 230
2018 291 195 245
2019 184 93 125
2020 190 89 136
2021 46 35 98
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