बहराइच। कैसरगंज निवासी एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसका पति उसे लेकर सीएचसी पहुंचा। यहां हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में महिला को भर्ती कर स्वास्थ्य कर्मियों ने खून व कोरोना जांच लिख दी। पति खून की जांच करवा लाया, लेकिन कोरोना की जांच नहीं हो सकी। इस दौरान महिला पीड़ा से कराहती रही।
पति इलाज व ऑपरेशन के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों का दिल नहीं पसीजा। स्वास्थ्य कर्मी एक-दूसरे से अस्पताल में मेंहदी लगवाती रहीं। इसी दौरान शिशु ने गर्भ में दम तोड़ दिया। इसके बाद भी ऑपरेशन नहीं किया गया। अंत में स्वास्थ्य कर्मियों ने शव को ऐसे ही बाहर निकाला।
कैसरगंज निवासी तौहीद आलम की पत्नी गुलजहां (35) गर्भवती थी। पति तौहीद आलम ने बताया कि नौ अगस्त को उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर वे पत्नी को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। सीएचसी में जांच के दौरान महिला की हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। महिला को मेडिकल कॉलेज के महिला विंग लेकर पति शाम पांच बजे पहुंचा।
महिला विंग में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने गर्भवती की खून व कोरोना जांच कराने के निर्देश दिए। पति ने खून की जांच कराई, जबकि कोरोना जांच का ऑफिस पांच बजे के बाद बंद हो गया। ऐसे में जांच नहीं हो सकी। इसी दौरान महिला प्रसव पीड़ा से परेशान रही।
पति ऑपरेशन के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन कर्मियों ने बिना कोरोना जांच के ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया। इसी दौरान गर्भ मेें शिशु की मौत हो गई। इसके बाद पति ऑपरेशन व इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन स्वास्थ्य कर्मी ध्यान न देकर एक-दूसरे के हाथों में मेंहदी लगवाती रहीं। 10 अगस्त की सुबह स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना ऑपरेशन के मृत शिशु को बाहर निकाला।
मुख्यमंत्री व प्राचार्य को भेजा शिकायती पत्र
कैसरगंज कस्बा निवासी गुलजहां के पति तौहीद आलम ने स्टाफ नर्स व चिकित्साक र्मी पर पत्नी के इलाज में लापरवाही बरतने व शिशु की जान जाने की शिकायत 1076 पर दर्ज करायी है। इसके अलावा पीड़ित ने मुख्यमंत्री और प्राचार्य को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
जांच कराकर होगी कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज आने वाले हर महिला व पुरुष मरीज की पहले कोरोना जांच कराने का नियम है। कोरोना जांच के बाद ही उसी हिसाब से इलाज होता है। लेकिन इलाज में लापरवाही करना गलत है। शिकायती पत्र मिलने पर मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अनिल के साहनी, प्राचार्य