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सावधान! मत बनिए जीजा, वरना खाली हो जाएगा आपका अकाउंट

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बहराइच। हेलो! जीजा जी प्रणाम। आप कैसे हैं। बहुत दिन हो गया था। आपसे बात ही नहीं। सोचा कि आपको फोन मिलाकर हाल चाल ले लूं। वैसे जीजा जी आपसे एक काम भी था। मेरे अकाउंट का लिमिट पूरा हो गया है। मेरा एक जगह से पैसा आना है। इसलिए रकम आपके खाते में भेजवा रहा हूं। दो-चार दिन बाद जब मैं आऊंगा तो वापस कर दीजिएगा। बस, आपको एक क्यूआर कोड भेज रहा हूं, उसे स्कैन कर दीजिए। अगर आपके पास भी ऐसी कोई कॉल आए तो सावधान हो जाइए। वरना क्यूआर कोड स्कैन करते ही आपका अकाउंट खाली हो जाएगा।
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जिले में साइबर ठगी के अजब-गजब मामले आने से अफसर भी हैरत में हैं। रिश्ते में जीजा बनाकर लोगों का पैसा हड़पने का नया ट्रैंड शुरू हुआ है। ये ठग फोन करते ही जीजा बनाकर ऐसा भरोसे में लेते आप भी इनकी मंशा नहीं भांप सकते। किसी रिश्तेदार का नाम बताकर लच्छेदार बातों में आपको उलझाकर रखते हैं। जब तक आप उनसे पहचान पूछेंगे, तब तक वह आपको दो-चार दिन पैसे रखने का लालच दे देंगे। आप सोचेंगे कि पैसे मिल रहे हैं, हो सकता है कि कोई रिश्ते का साला हो ही। बस यही लालच आपको भारी पड़ेगी और आपका अकाउंट मिनटों में खाली हो जाएगा। (संवाद)
केस - 1
देहात कोतवाली क्षेत्र के डीएम कॉलोनी निवासी संतोष वर्मा के पास तीन अप्रैल को एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन उठते ही कहा कि जीजा प्रणाम। संतोष ने कहा कि कौन, हम पहचाने नहीं। उधर से आवाज आई अरे! हम गुड़िया के हसबैंड बोल रहे हैं। पहचाने नहीं। अच्छा सुनिए हमारे पेटीएम का लिमिट पूरा हो गया है और मेरा एक पैसा आना है। मैं एक क्यूआर कोड भेज रहा हूं, जरा आप स्कैन कर लो। मैं दो-चार दिन में आकर अपना पैसा ले लूंगा। कोड को स्कैन करते ही संतोष के खाते से एक लाख रुपये कट गये। पैसा कटते ही पीड़ित ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। साइबर सेल वालों ने क्यूआर कोड मंगाकर बैंक की जानकारी करते हुए ट्रांजेक्शन पर रोक लगवा दी। बैंक से बातचीत करके जांच की तो मामला फ्राड का पाया गया। फोन किसने किया था, इसका पता अब तक नहीं चला है। पीड़ित को साइबर सेल की मदद से पैसा वापस मिल गया।
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केस- 2
हरदी थाना क्षेत्र के देवराय गांव निवासी अवधेश कुमार भी साइबर अपराधियों के फेंके जाल में फंस गए। अवधेश के पास भी एक फोन आया और फोन करने वाले ने जीजा कहकर नमस्ते किया। अवधेश ने पूछा कि कौन तो उसने कहा कि मैं मुन्नी का हसबैंड बोल रहा हूं। घर में मुन्नी नाम की एक रिश्ते की बहन होने के कारण अवधेश समझ नहीं पाएं और बात करने लगे। उसने अपने झांसे में लेते हुए कहा कि बैंक की लिमिट पूरी हो गई है। मेरे पैसे आने हैं तो आपके पेटीएम अकाउंट में भेज दे रहा हूं। अवधेश ने सोचा कि पैसे आने हैं तो वह भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन कर लिये। स्कैन करते ही अवधेश के खाते से 21 हजार रुपये कट गये। पीड़ित ने साइबर सेल में शिकायत की। साइबर सेल की टीम ने पता किया। लेकिन जिस खाते में पैसा मंगाया गया था, उससे रकम निकल चुकी थी। टीम जांच कर रही है।
कॉमन नाम का सहारा लेकर करते हैं ठगी
साइबर सेल प्रभारी पंकज सिंह ने बताया कि साइबर ठगी करने वाले लोगों ने अब नया ट्रेंड अपनाया है। वह गुड़िया, छुटकी, मुन्नी व पूजा जैसे कॉमन नाम का सहारा लेते हैं। अधिकतर घरों में इस नाम की लड़कियां मिल जाती हैं। इंसान बिना पूरी तरीके से समझे हुए झांसे में आ जाता है और क्यूआर कोड को स्कैन कर देता है। जिसके बाद पैसा कट जाता है। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
1930 पर तत्काल दर्ज कराएं शिकायत
साइबर सेल प्रभारी बताते हैं कि अगर किसी के साथ पैसे को लेकर फ्राड हुआ है और वह किसी भी तरीके के झांसे में आकर फंस जाता है तो वह तत्काल 1930 नंबर पर कॉल करके इसकी सूचना दें, जिससे तत्काल उस ट्रांजेक्शन को रोका जा सकेगा और पैसे को वापस दिलाया जा सकता है। ऐसे में जागरूकता बहुत जरूरी है। बिना किसी जान-पहचान व अनजाने लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई जानकारी शेयर करें।
जागरूकता के लिए चलाया जा रहा अभियान
साइबर ठग रोजाना नये-नये तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सभी थानों पर साइबर हेल्प डेस्क भी बनाया गया है। अगर ऐसी कोई घटना होती है तो तत्काल पुलिस को सूचना दें और 1930 पर कॉल करके भी शिकायत दर्ज कराएं। अनजान कॉल व लिंक से सचेत रहे। अनजान किसी को भी ओटीपी न बताएं। -केशव चौधरी, एसपी बहराइच
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