बहराइच। केंद्रीय होली समिति के तत्वावधान मेें नगर के शाही घंटाघर पार्क में बुधवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। हंसी और ठिठोली की रचनाओं के बीच पूरी रात श्रोता डटे रहे।
बस्ती की कवियत्री शिवा त्रिपाठी की वाणी वंदना से प्रारंभ हुए कवि सम्मेलन में आसनसोल पश्चिम बंगाल से आये पवन बांके बिहारी ने दिल्ली के आंदोलन पर तीक्ष्ण प्रहार कर कहा कि दबी राख में लिये आग बैठा है, सपेरों की सरपरस्ती में नाग बैठा है। जिंदगी मुसलसल एक तमाशा है, उधर जाना नहीं, शाहीन बाग बैठा है। बाराबंकी के हास्य कवि प्रमोद पंकज ने कहा कि कोरोना-कोरोना आना नहीं, मेरे देश में। लखनऊ की श्रृंगार रस की कवियत्री हेमा पांडेय ने कहा कि कहोगे जो कभी हमसे तो सारा काम कर देंगे, तुम्हारे वास्ते अपनी सुबह और शाम कर देंगे। जरूरत ही नहीं मुझको किसी के नेह की गंगा, हम अपनी जिंदगानी तुम्हारे नाम कर देंगे।
बाराबंकी के व्यंग्यकार आशीष आनंद ने कहा कि आलू से सोना बनवाना ही है काफी नहीं, आलू के परेठे वाली का प्रबंध कीजिए। ओज के लखनऊ से आए कवि डॉ. अतुल बाजपेयी ने पढ़ा कि सर्वोच्च रहेगा कीर्ति केतु, मैं सवा अरब की ताकत हूँ। मैं भारत हूं, मैं भारत हूं, मैं भारत हूं, मैं भारत हूं। श्रृंगार रस की कवियत्री डॉ. शिवा त्रिपाठी ने श्रोताओं पर फागुन की फुहार छोड़कर कहा कि प्रीत लिये अब फागुन की सुन नाच रहा मनमोर सखी री, नेह भरे बदरा बरसे जब अंग अनंगित हूक उठी री।
लखनऊ की ही कवियत्री अर्चना अभिनव ने पढ़ा कि रहे खामोश लब लेकिन नजर से बात हो जाये। बिना सावन मोहब्बत की सघन बरसात हो जाये। ओज के कवि योगेश चौहान ने वीर जवानों की शहादत पर कहा कि बने तिरंगा कफन बदन का, मन में यह अरमान लिखा था। समर भूमि पर दुश्मन के हिस्से में श्मशान लिखा था। पहुंचा द्वारे पर शहीद तो जन सैलाब उमड़ पड़ा, कफन हटाकर देखा तो छाती पर हिंदुस्तान लिखा था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सिद्धेश्वर क्रांति ने पढ़ा कि वतन में आतताई को कभी टिकने नही देंगे। वतन की आबरू-इज्जत कभी लुटने नहीं देंगे। काव्य मंच के संचालक एवं हास्य-व्यंग्य के कवि बिहारी लाल अंबर ने पढ़ा कि अपनी जमुना रहे अपनी गंगा रहे न किसी शहर में दंगा रहे। सर भले ही कटे इस वतन के लिये पर यह लहराता अपना तिरंगा रहे। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष दीपक सोनी दाऊ जी, महामंत्री सुमित खन्ना, कार्यक्रम संयोजक हेमंत मिश्र, उमाकांत शुक्ल, राघवेंद्र नाथ गुप्ता आदि मौजूद रहे।