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महसी विधायक के घर से 40 साल बाद छिन गई प्रधानी

Sun, 13 Dec 2015 10:45 PM IST
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो
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पंचायत चुनाव में कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा धूल में मिल गई। 40 साल तक प्रधानी की कुर्सी पर कब्जा जमाने वाले महसी विधायक केके ओझा के घर से इस बार कुर्सी खिसक गई। उनकी मां को इस बार जनता ने नकार दिया है। वहीं, पूर्व विधायक सुरेश्वर सिंह के भाई ने इस चुनाव में मुंह की खाई है। केके ओझा की मां महज 17 मतों के अंतर से चुनाव हार गईं। इसके अलावा लखनऊ जिला पंचायत से सेवानिवृत्त हुए अपर मुख्य अधिकारी को भी पंचायत चुनाव में शिकस्त खानी पड़ी है।
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बसपा के महसी विधायक केके ओझा की मां मंशा देवी महसी तहसील अंतर्गत पिपरा ग्राम पंचायत से चुनाव मैदान में थीं। इसी ग्राम पंचायत के उमेशचंद्र सामान्य सीट से चुनाव लड़ रहे थे। रविवार सुबह मतों की गिनती शुरू हुई तो दोपहर दो बजे तक उतार-चढ़ाव का दौर चला, जिससे सभी की सांसें थमतीं नजर आई। अंतत: उमेशचंद्र 414 मत पाकर विजयी रहे। जबकि विधायक की मां मंशा देवी को 397 मत ही मिले। गौरतलब हो कि महसी के बसपा विधायक केके ओझा के घर में 40 साल से ग्राम प्रधानी चली आ रही थी। पहले इनके पिता और फिर मां प्रधान बनी थीं लेकिन इस बार जनता में बदलाव की बयार थी। जिसके चलते विधायक के परिवार से प्रधानी की सीट खिसक गई।

वहीं, महसी के पूर्व विधायक सुरेश्वर सिंह के सगे भाई योगेश्वर सिंह सिसैया चूड़ामड़ि ग्राम पंचायत चुनाव मैदान में थे। योगेश्वर सिंह को महज 1047 मत मिले। योगेश्वर के प्रतिद्वंद्वी नीरज सिंह 1325 मत पाकर विजयी रहे। इसी विकासखंड में लखनऊ जिला पंचायत कार्यालय के अपर मुख्य अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए मिथलेश श्रीवास्तव भी पंचायत चुनाव में भाग्य आजमा रहे थे। उन्हें सिर्फ 330 वोट मिले। उनके प्रतिद्वंद्वी सुरेश श्रीवास्तव 660 वोट पाकर विजयी रहे। पयागपुर विकास क्षेत्र में ग्राम पंचायत बेलवा पदुम से कांग्रेस नेता भगतराम मिश्रा के पुत्र मोनू मिश्रा प्रधान पद के उम्मीदवार थे लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी। महज 96 वोट ही मिले।
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