बहराइच। कोतवाली देहात के नगरौर गांव निवासी हत्या के अभियुक्त को अपर जिला जज प्रथम की अदालत ने सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी दिया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। करीब 25 साल तक चले मुकदमे में सोमवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया।वादी मुकदमा सफाउल्ला ने 25 सितंबर 2001 को कोतवाली देहात में तहरीर देकर बताया था कि वह अपने भाई लोकई के साथ डीहा गांव से वापस नगरौर स्थित घर जा रहे थे। शाम करीब साढ़े छह बजे जब वे एक खेत के पास पहुंचे, तभी नगरौर गांव निवासी अजमेर अली अपने साथियों के साथ हाथ में फावड़ा लेकर आ गया। आरोप है कि अजमेर ने लोकई को जमीन पर गिराकर फावड़े से उनकी गर्दन काट दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर अजमेर अली के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर जांच पूरी करने के बाद 24 नवंबर 2003 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मामले की सुनवाई अपर जिला जज प्रथम पवन कुमार शर्मा की अदालत में हुई। सोमवार को शासकीय अधिवक्ता व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी अजमेर अली को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।