चित्तौरा झील के तट पर बुधवार को निशान पूजा करने के बाद पलंग पीढ़ी लेकर झूमते जायरीन। -संवाद
हाथों में पलंग पीढ़ी और निशान लेकर गाजी मियां की शान में कसीदे पढ़ते दरगाह शरीफ पहुंचने लगे जायरीन
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्तौरा (बहराइच)। सैय्यद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर 30 मई से जेठ मेले की शुरुआत हो रही है। मेले में जायरीन के ठहरने के लिए टेंट लगाया गया है। जहां बड़ी संख्या में जायरीन मजार-ए-मुबारक पर हाजिरी लगाने के लिए पहुंचने लगे हैं। मुख्य मेले में शामिल होने के लिए चित्तौरा झील के तट पर भी परंपरा और आस्था का संगम देखने को मिल रहा है। बुधवार को अकीदतमंद झील में स्नान करने के बाद गाजी मियां की शान में कसीदे पढ़ते हुए दरगाह शरीफ को रवाना हुए।
सैय्यद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर चलने वाले जेठ मेले में शामिल होने के लिए बुधवार को सुबह से लेकर शाम तक गोरखपुर आजमगढ, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बाराबंकी सहित अन्य जगहों से आए जायरीन का पहला पड़ाव चित्तौरा झील पर होता है। यहां दूर दराज से आए जायरीन झील में स्नान करने के बाद अपनी परंपरा व आस्था को निभाते हैं। इसके साथ ही हाथों में निशान व पलंग पीढ़ी लेकर ढोल नगाड़े के साथ झूमते गाते हुए गाजी मिया की शान में कसीदे पढ़ते हुए चित्तौरा झील से हठीला शरीफ मजार पर पहुंचते हैं, जहां लोग अपनी-अपनी आस्था के अनुसार मन्नते मांगते हुए दरगाह के लिए रवाना होते हैं।