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जलविहीन गेरुआ, जीवों पर मंडराया संकट

Wed, 29 Oct 2014 05:31 AM IST
Bahraich
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बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीचोबीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी गिरिजापुरी बैराज का फाटक खोलने से अचानक सूख गयी है। इससे नदी में गैंगेटिक डाल्फिन की उछलकूद तो गुम हुई ही, धूप सेंकते घड़ियाल और मगरमच्छ भी नहीं दिख रहे। शीतकाल में प्रवास के लिए आने वाले साइबेरियन पक्षी की चहचहाहट भी जंगल के वातावरण में सुनाई नहीं दे रही है। नदी के अचानक जलविहीन होने से जीवों की सुरक्षा पर संकट उत्पन्न हो गया है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में नेपाल के पहाड़ से कई नदी और नाले जंगल के बीच से होकर बहते हैं। इन्हीं में शामिल है नेपाल की गेरुआ नदी। यह नदी कोठिया घाट से भारतीय सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीच से होकर बहती है। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर गेरुआ नदी का नेपाल से आने वाली काैड़ियाला नदी से संगम होता है। फिर यहां से घाघरा नदी बनती है। बैराज के फाटक की साफ सफाई हर 6 महीने पर होती है। इसके चलते बैराज के सभी फाटक खोल दिए जाते हैं। इस पर गेरुआ और कौड़ियाला नदियों का पूरा पानी घाघरा नदी में जा गिरता है। जिससे दोनो नेपाली नदियां सूखी नजर आती हैं। इस बार भी दो दिन पूर्व चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर मरम्मत के लिए सभी फाटक खोल दिए गए हैं। जिसके चलते 24 घंटे में नदी पूरी तरह से सूख गयी है। नदी के पूर्वी किनारे पर ही मामूली पानी बचा है। जिससे जलीय जीव गैंगेटिक डाल्फिन, मगरमच्छ और घड़ियाल भी कहां चले गए पता नहीं। इस समय गेरुआ नदी की हालत यह है कि आराम से लोग पैदल नदी पार कर रहे हैं। प्रवास के लिए साइबेरियन पक्षी हर साल गेरुआ नदी मेें आते हैं। मौसम आहट दे रहा है। लेकिन नदी के सूखने से जहां प्रवासी पक्षी किनारा कस सकते हैं। वहीं कतर्निया आने वाले पर्यटकों को भी निराशा हो सकती है।
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