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श्रावस्ती में 61.50 प्रतिशत हुआ मतदान

Mon, 27 Feb 2017 10:31 PM IST
अमर उजाला/श्रावस्ती
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मतदान के लिए लाइन लगाए मतदाता - फोटो : अमर उजाला
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17वीं विधानसभा गठन के लिए सोमवार को जिले के वोटरों ने 24 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद कर दिया। इस दौरान जिले में कुल 61.50  प्रतिशत मतदान हुआ। वोट डालने के लिए बूथों पर मतदाताओं में भारी उत्साह दिखा। इस दौरान मतदान केंद्राें पर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। मतदान के दौरान जिले में कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। बूथों पर केंद्रीय बल के जवान मुस्तैदी से तैनात दिखाई दिए। 
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विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को समझाने के लिए कई तरीके से अपील की गई थी। इस अपील के तहत जिला प्रशासन ने चार किलोमीटर मानव श्रृंखला, रंगोली प्रतियोगिता, बैनर प्रतियोगिता व अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित कीं। बूथ से लेकर नगर तक रैलियां निकलीं। जगह-जगह होर्डिंग व पोस्टर के साथ गांवों में निकाली गई मतदाता जागरूकता रैलियों का असर मतदान के दिन साफ देखने को मिला।

मतदान केंद्राें पर वोट डालने के लिए मतदाताओं की भीड़ जुटी रही। जिले में कुल सात लाख 38 हजार 153 मतदाता वोटर लिस्ट में पंजीकृत हैं। इन मतदाताओं ने सोमवार को भिनगा विधानसभा क्षेत्र के दस व श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र के 14 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कर दिया। मतदान के दौरान वोटरों की सोच पल-पल बदलती रही। पहले जहां 11 बजे तक मतदान केंद्रों पर सन्नाटा छाया रहा। वहीं बारह बजे के बाद केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ देखने को मिली। कुछ मतदान केंद्रों पर निर्धारित समय पांच बजे के बाद भी कतारबद्ध लोगों ने मतदान किया। इस दौरान जिले में 61.50 प्रतिशत मतदान हुआ।
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इसमें से श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र में 63.90 व भिनगा विधानसभा क्षेत्र में 64.57 प्रतिशत मतदान हुआ। इस दौरान जहां नि:शक्त, बुजुर्ग, महिला, किन्नर व नव मतदाताओं ने मतदान के प्रति अपना सकारात्मक रुझान दिखाया, वहीं जिले में बनाए गए आदर्श बूथों पर भी काफी चहल-पहल देखी गई। यहां बुजुर्ग मतदाताओं को बिठाने के लिए कुर्सी तो पीने के लिए मिनरल वाटर दिया गया।

कुछ आदर्श बूथों पर तो चाय की भी व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई थी। उधर, पांचवें चरण में जिले के लोगों ने चुनाव के पहले के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। मतदान के प्रति जागरूकता ने इसे और संबल दिया। घरों की दहलीज लांघ कर बूथों तक वृद्ध, नि:शक्त, महिलाएं व युवा मतदाता ने साफ कर दिया कि लोकतंत्र के असली मालिक वही हैं। जागरूक मतदाताओं ने इस महापर्व को त्योहार की ही तरह ही मनाया।
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