बिछिया/कतर्नियाघाट। दो माह पहले तस्करी कर विदेश ले जाए जा रहे 388 कछुओं को नागपुर एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था।
कुकरैल घड़ियाल केंद्र में इन कछुओं के रहन-सहन का अध्ययन करने के बाद गुरुवार को इन्हें कतर्नियाघाट के महादेवा ताल झील में मुक्त कर दिया गया। टर्टल सरवाइवल एलायंस और वन विभाग के विशेषज्ञों की मौजूदगी में कछुओं को झील में छोड़ा गया।
तराई में घाघरा, सरयू और राप्ती नदियां कछुओं की वंश वृद्धि के लिए मुफीद मानी जाती हैं। इसके चलते अक्सर कछुओं के तस्कर और शिकारियों की नजर नदियों में विहार करने वाले अत्यधिक पुराने कछुओं पर होती हैं।
मई में तस्करों ने क्षेत्रीय शिकारियों की मदद से घाघरा, सरयू, राप्ती से 388 कछुओं का शिकार किया था। इसके बाद इन्हें सड़क मार्ग से महाराष्ट्र के नागपुर पहुंचाया गया। वहां से हवाई मार्ग द्वारा कछुओं को खाड़ी देश भेजा जा रहा था।
इसकी भनक लगने पर टर्टर सरवाइवल एलायंस (टीएसए) के कंट्री डॉयरेक्टर डॉ. शैलेंद्र सिंह, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डॉ. रूपक डे की अगुवाई में टीएसए और वन विभाग की टीम ने 23 मई को नागपुर हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से कछुओं को बरामद किया था। अभियान में टर्टर सरवाइवल एलायंस के तराई सेक्टर के समन्वयक भास्करमणि दीक्षित भी शामिल थे।
दीक्षित ने बताया कि सभी कछुओं को लखनऊ के कुकरैल घड़ियाल केंद्र पर लाकर टैंक में संरक्षित किया गया था। यहां दो माह तक कछुओं के रहन-सहन का अध्ययन किया गया।
यह निष्कर्ष निकाला गया कि कतर्नियाघाट की नदी और झील इन कछुओं के लिए काफी मुफीद है। इसके चलते गुरुवार सुबह टर्टर सरवाइवल एलायंस के समन्वयक दीक्षित की अगुवाई में टीम ने कतर्नियाघाट के महादेवा ताल झील पहुंचकर सभी कछुओं को मुक्त कर दिया है।
इस दौरान रेंज अधिकारी कुकरैल एमपी सिंह, टीएसए की डायरेक्टर अनामिका, महेंद्र प्रताप, प्रभारी रेंजर गयादीन, एसडीओ जेएन सिंह, डिप्टी रेंजर रमेश चंद्र, नाविक रामरूप आदि मौजूद रहे।