जरवलरोड/राजीचौराहा। घाघरा का जलस्तर फिर बढ़ता जा रहा है। गुरुवार दोपहर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया, जिसके चलते महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ का हालात बन गए हैं।
ग्रामीणों में हड़कंप मचा है लेकिन अब तक राहत और बचाव कार्य पूरी तरह शून्य हैं। सिर्फ राजस्वकर्मी गांव में कैंप कर रहे हैं। भयभीत ग्रामीण अपनी संपत्ति समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही कटान भी चल रही है। तीन मकान समाहित हुए हैं। वहीं, 110 बीघा खेती योग्य जमीन भी कटी है।
वर्षा नहीं हो रही लेकिन बहराइच फिर बाढ़ की विभीषिका झेलने की कगार पर पहुंच गया है। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही वर्षा के चलते घाघरा नदी में गिरिजापुरी, बनबसा और शारदा बैराज से गुरुवार को लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघरा घाट के मापक जगदीश प्रसाद ने बताया कि एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान 106.07 है जबकि नदी का पानी 106.776 मीटर पर पहुंच गया है। इस समय नदी खतरे के निशान से 70.6 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र के दर्जन भरगांव बाढ़ की विभीषिका झेलने के कगार पर पहुंच गए हैं।
गोलागंज टेपरी, कायमपुर, जरमापुर, पिपरी, पिपरा गांव में स्थिति भयावह हो रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान भी हो रही है। जरमापुर निवासी रामकुमार, भगौती, जगदंबा समेत 13 से अधिक ग्रामीणों की खेती योग्य जमीन में कटान हो रही है।
गोलागंज टेपरी निवासी गुड्डू सिंह समेत तीन ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो गए हैं। वहीं, कैसरगंज तहसील क्षेत्र में तटबंध के उस पार बसे गड़रियनपुरवा समेत चार गांवों के आसपास पानी भरने लगा है। रात तक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना जताई जा रही है।
उपजिलाधिकारी महसी सीपी तिवारी ने बताया कि वह स्वयं क्षेत्र में भ्रमण कर नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। तटबंध के उस पर स्थित गांवों में राजस्व लेखपाल रामानुज गिरि, अली अहमद आदि कैंप कर रहे हैं।