बहराइच। रमजान माह में जहां एक ओर मुस्लिम समाज रोजे रखकर इबादत कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदी भी रोजा रखकर इबादत कर रहे हैं। महिला कैदी व बंदी भी इस मामले में अव्वल हैं। जेल प्रशासन ने रोजेदारों के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की है तो वहीं ईद पर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
इस्लाम धर्म में मान्यता है कि रमजान के पवित्र माह में पूरे तीस दिनों तक रोजा रखने के नियमों का पालन करते हुए दान करें, जिसमें बीमार व बच्चों को छोड़कर प्रत्येक मुस्लिम को रोजा रखना फर्ज माना जाता है। इसी तरह जिला कारागार में 220 मुस्लिम कैदी-बंदी रोजा रख रहे है, जिसमें 215 पुरुष बंदी और पांच महिला कैदी रोजा रखकर खुदा की इबादत कर अपनी संकल्प शक्ति को मजबूत कर रहे हैं।
जेल प्रशासन ने रोजा रखने वाले कैदियों के लिए विशेष व्यवस्था की है। सुबह सहरी के समय रोजा खोलने के लिए उन्हें खजूर, शर्बत, बिस्किट, केला, दूध, दही आदि दिया जाता है तो वहीं शाम को इफ्तार के समय खजूर के बाद व्यवस्थाओं के हिसाब से उस दिन बनी दाल, सब्जी, चावल और चपाती दी जाती है। कैदी बैरकों में ही पांच वक्त की नमाज पढ़ कर अमन और शांति की दुआ करते है।
वहीं ईद के मौके पर जेल प्रशासन ने रोजेदारों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सिवईं बनवाकर बंटवाने की भी विशेष व्यवस्था कर रखी है। जेल में बंद 1130 कैदियों में से जहां एक ओर मुस्लिम बंदी रोजा रखे हुए हैं। वहीं कारागार में एनडीपीएस के मामले में बंद एक हिंदू कैदी भी रोजा रखकर खुदा की इबादत कर रहा है।
जेल के सभी कैदियों के लिए एक समान नियम हैं। यदि कोई अन्य धर्म का कैदी भी पूजा-पाठ या उपवास रखता है तो उसके लिए भी निर्धारित बजट में उपवास सामग्री देने का नियम है। मुस्लिम कैदी रोजा रखता है तो उसे भी निर्धारित बजट में ही खाद्य सामग्री सूखे मेवे, दूध आदि दिया जा रहा है।
- जेल अधीक्षक राजेश यादव