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बहराइच में हर माह मिल रहे 14 एचआईवी संक्रमित

Sat, 22 Jul 2017 10:56 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
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परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए परदेश गए, लेकिन बड़े शहरों की चकाचौंध व काम के बोझ से उपजे तनाव ने इस कदर घेरा कि जाने-अनजाने एचआईवी से संक्रमित हो गए। परदेश से कमाकर घर लौटे तराई के 88 लोग जनवरी से अब तक एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं।
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इनमें तीन फीसदी ऐसी गर्भवती महिलाएं भी हैं, जो अनजाने में एचआईवी संक्रमण के चंगुल आ गई हैं। इसका खुलासा जिला अस्पताल स्थित आईसीटीसी सेंटर की जांच से हुआ है। औसतन हर माह जिले में 14 लोग एचआईवी से संक्रमित मिल रहे हैं। तराई में एड्स से बढ़ रहे मामलों से जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हतप्रभ हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी व स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद तराई में एचआईवी पॉजिटिव का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। इसकी बड़ी वजह साक्षरता व एड्स के प्रति जागरूकता की कमी है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी पांडेय बताते हैं कि इंटीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) में प्रतिमाह औसतन 400 लोगों की जांच की जाती है। जिनमें से औसतन 14 लोग एचआईवी पॅाजिटिव मिल रहे हैं।
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पिछले वर्ष यह ग्राफ काफी कम था। वहीं, इस वर्ष जनवरी से अब तक 88 लोग एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। जिले में एड्स के प्रसार को रोकने के लिए काम कर रहे कर्मियों का कहना है कि एचआईवी पॉजिटिव में ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो जिले से बाहर बडे़ शहरों में नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 450 गर्भवती महिलाओं की जांच में 15 महिलाएं ऐसी मिली हैं, जो एचआईवी पॉजिटिव पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि ड्रग्स यूजर्स के अलावा मजदूर, खोमचे व रिक्शा चालकों की संख्या अधिक है।
  मुख्य चिकित्सा अधीक्षक  डॉ. ओपी पांडेय ने कहा कि वर्ष 2001 में जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर की स्थापना की गई थी। यहां श्रावस्ती व बहराइच के संदिग्ध एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जांच की जाती है। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद संक्रमित व्यक्ति को नोडल कार्यालय डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ भेज दिया जाता है। वहां उसका इलाज होता है। संक्रमित रोगी का नाम व पता गोपनीय रखा जाता है।

उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की तरफ से बहराइच के 14 ब्लॉकों के 106 गांवों को एचआईवी संक्रमण से प्रभावित माना गया है। लोगों को एड्स से बचाव के प्रति जागरूक और ग्रामीणों को एचआईवी की जांच के लिए प्रेरित कर रही है। इन गांवों की आबादी करीब चार लाख है, जिनमें से 56 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं।

उत्तर प्रदेश एड्स नियंत्रण सोसायटी ने जिले के 14 ब्लॉकों में कैसरगंज, जरवल, तेजवापुर, चित्तौरा, पयागपुर व विशेश्वरगंज को डेंजर जोन में शामिल किया है। सोसायटी की मानें तो इन ब्लॉकों में सबसे अधिक एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं।

सोसायटी की ओर से चिन्हित गांवों में हाई रिस्क  ग्रुप बनाया गया है। जिसमें 98 गे (होमो सेक्सुअल) व 400 महिला सेक्स वर्करों को शामिल किया गया है। इन लोगों में एचआईवी संक्रमण फैलने की संभावना सबसे अधिक होती है, इसलिए इन पर खास ध्यान रखा जाता है। हाई रिस्क ग्रुप के सदस्यों को समय-समय पर एड्स के प्रति जागरूक करते हुए सावधानी बरतने के टिप्स सुझाए जाते हैं। 


इस वर्ष के आंकड़े 
जनवरी-05, फरवरी-16, मार्च-09, अप्रैल-12, मई-20, जून-16, जुलाई में अब तक-10 एचआईवी पॉजिटिव को मिलाकर साढ़े छह माह में 88 संक्रमित की पुष्टि हुई है। 

इंसेट 
साल-दर-साल बढ़ रहे रोगी
वर्ष            रोगी
2007            30
2008            41
2009            34
2010            82
2011            61
2012            67
2013            131
2014            170
2015            143
2016            126
2017 में अब तक-    088


एचआईवी के लक्षण
बुखार, कमजोरी, शरीर में दर्द, सिर में दर्द, गले में खराश, डायरिया, लाल चकत्ते, तंत्रिका क्षति या दर्द, वजन में कमी, जीभ या मुंह पर सफेद धब्बे, सूखी खांसी, सांस की तकलीफ होना।
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