बहराइच। जिले में चार चीनी मिलों का संचालन नवंबर माह में शुरू हो हुआ था। सभी मिलों पर 106.08 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई बुधवार तक हुई है। इनमें गन्ना किसानों को भुगतान करने में सबसे फिसड्डी चिलवरिया चीनी मिल है। चिलवरिया चीनी मिल में पिछले सत्र व नए सत्र का 131 करोड़ रुपया बकाया है। वहीं जरवल और नानपारा चीनी मिल में 29.15 करोड़ रुपया बकाया है। जबकि पारले चीनी मिल ने शत-प्रतिशत गन्ना भुगतान कर दिया है।
तराई का बहराइच जिला कृषि बाहुल्य है। यहां के किसान नकदी फसल के रूप में अधिक मात्रा में गन्ने की बोआई करते हैं। गन्ना पेराई के लिए जिले में चार चीनी मिल संचालित हैं। चिलवरिया में स्थित शिंभावली शुगर मिल, परसेंडी में स्थित पारले चीनी मिल, जरवल में स्थित आईपीएल चीनी मिल और नानपारा में स्थित श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल में गन्ने की पेराई होती है।
इनमें श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल सरकारी है। जबकि अन्य तीन प्राइवेट चीनी मिल हैं। इन चीनी मिलों पर नवंबर से 10 फरवरी तक 106.08 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद हुई है। चीनी मिलों पर गन्ना पेराई कार्य निर्बाध गति से चल रहा है। किसान कड़ी मेहनत कर गन्ना चीनी मिलों को पहुंचा रहे हैं। लेकिन चीनी मिल के कर्मचारी गन्ना किसानों को भुगतान करने में काफी पीछे हैं। चिलवरिया चीनी मिल में वर्ष 2019-20 का ही 57 करोड़ रुपया बकाया है। जबकि सत्र 2020-21 का 74 करोड़ रुपया बकाया हो गया है। वहीं जरवल का आईपीएल और नानपारा में स्थित श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल पर 29.15 करोड़ रुपया बकाया है।
जिला गन्ना अधिकारी शैलेष कुमार मौर्या ने बताया कि पारले चीनी मिल परसेंडी द्वारा शत-प्रतिशत गन्ना किसानों का भुगतान कर दिया गया है। जबकि चिलवरिया में अभी बीते सत्र का ही 57 करोड़ रुपया बकाया है। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि किसानों को बकाया भुगतान के लिए चीनी मिलों को पत्र लिखा गया है। जिससे मिल कर्मचारी किसानों को समय से गन्ना बकाया का भुगतान कर सकें।
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि चिलवरिया में स्थित शिंभावली व पारले चीनी मिल का संचालन 27 नवंबर को शुरू हुआ था। जबकि जरवल में स्थित आईपीएल का संचालन 20 नवंबर व श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल का संचालन 18 नवंबर को हुआ था।