संसार को धोखा दे सकते हो, आत्मा को नहीं: गुप्ति सागर
बड़ौत। उपाध्याय गुप्तिसागर महाराज ने कहा कि शनिवार से पंचकल्याणक महामहोत्सव शुरू हो रहा है। यह पंचकल्याणक इंसान की आत्मशुद्धि, भक्ति, जीवन कल्याण और पाषाण से भगवान बनने का पंचकल्याणक है।
शुक्रवार को दिगंबर जैन अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में महाराज ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने आपको अद्वितीय समझने लगता है और चरित्र में सबसे श्रेष्ठ मानने लगता है, तब से उसका आध्यात्मिक पतन होने लगता है। अहंकार से उतना ही सावधान रहो, जितना एक पागल कुत्ते से। अपने मन और हृदय की क्रियाओं को ईश्वर की ओर संचारित करों। पढ़ा लिखा समझने वाला संपन्न इंसान न तो दूसरों को दोष लगाता है और न अपने को शक्तिमान वस्तुओं से आच्छादित होने के कारण स्थितियों की अवहेलना करता है। यदि तुम शांति, सामर्थ्य और शक्ति चाहते हो तो अपनी अंतरात्मा का सहारा लों। तुम सारे संसार को धोखा दे सकते हो, किंतु अपनी आत्मा को नहीं। यदि प्रत्येक कार्य में अंतरात्मा की संपत्ति प्राप्त करोगे तो विवेक पथ नष्ट न होगा। दुनिया भर का विरोध करने पर भी यदि अपनी अंतरात्मा का पालन कर सके तो कोई भी आपको सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकता। दूसरों का विश्वास तुम्हें अधिकाधिक असहाय और दु:खी बनाएगा। इसलिए मार्गदर्शन के लिए अपनी ओर देखो, दूसरों की ओर नहीं। तुम्हारी सत्यता तुम्हें दृढ़ बनाएगी और यही दृढ़ता तुम्हें लक्ष्य तक ले जाएगी। धर्मसभा का संचालन अमित जैन ने किया। इस दौरान पंकज, अजय, अनिल, मुकेश, अनुज सुखमाल, अमर, अल्पना, अंजू, कृष्णा, सुमन, संगीता, आंचल, आदिश जैन आदि मौजूद रहे।