बिनौली (बागपत)। जिवाना के नीलकंठ आश्रम में चल रहे सात दिवसीय ऋग्वेद पारायण महायज्ञ के पांचवें दिन मंगलवार को आचार्य चंद्रमणि याज्ञनिक ने कहा कि मनुष्य शरीर से नहीं अपने गुण व श्रेष्ठ कर्मों से जाना जाता है।
महायज्ञ के ब्रह्मा आचार्य चंद्रमणि ने श्रद्धालुओं को वेदोपदेश देते हुए कहा कि वेदों में जो ज्ञान हमें प्राप्त होता है। उसके अनुरूप हमें मनुष्य बनना चाहिए। मनुष्य शरीर से नहीं, वरन अपने आदर्श गुणों, सदाचरण, अच्छा चिंतन व श्रेष्ठ कर्मों से जाना जाता है। इसी तरह संसार में मनुष्य की नहीं बल्कि उसके गुणों की पूजा होती है। वेद का आदेश है कि हम सब चिंतनशील प्राणी मनुष्य बन जाए और अपने अंदर दिव्य गुणों को जागृत करें। सिद्ध गुरु महाराज ने अपने उपदेश में कहा कि गुरु के प्रति सच्चा समर्पण, श्रद्धा व विश्वास होना चाहिए। गुरु सन्मार्ग दिखाने वाला होता है। इस दौरान गुरुकुल लाक्षागृह के आचार्य अमित शास्त्री व अंकुर भारद्वाज ने वेद मंत्रों के सस्वर उच्चारण के साथ प्रभु भक्ति से ओतप्रोत सुमधुर भजन प्रस्तुत किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आहुति देकर पुण्य अर्जित किया।