बागपत के जानकीदास मंदिर में मां काली के भजन कीर्तन प्रस्तुत करती महिला श्रद्घालु
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बागपत। चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन घरों और मंदिरों में मां दुर्गा के सातवें रूप मां काली की पूजा अर्चना की गई। मां के इस रूप को कालरात्रि भी कहा जाता हैं। मां कालरात्रि दुष्टों का नाश करती हैं।
बाबा जानकीदास मंदिर में मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि देवी मां कालरात्रि की पूजा करने से श्रद्धालुओं के सभी दुख दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि देवी कालरात्रि अज्ञानता का नाश करती है, दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत इनका नाम से भाग जाते हैं। इनकी उपासना करने ग्रह-बाधाओं से मुक्ति मिलती है। मां की पूजा करने से आग, जल, जंतु, शत्रु और अंधकार का भय नहीं रहता है। माता कालरात्रि की पूजा ब्रह्ममुहूर्त में की जाती है। शुक्रवार को मंदिर में माता को कुमकुम, लाल पुष्प, रोली चढ़ाकर माता का पूजन किया गया। मंदिर में सप्तशती कर भोग लगाया गया। दोपहर में मंदिरों में भजन-कीर्तन के कार्यक्रम कर माता का गुणगान किया गया।